निर्माण कार्य ने गुणवत्ता, पारदर्शिता और जवाबदेही—तीनों की खोलकर रख दी है पोल
ब्यूरो समाज जागरण
सोनभद्र। गुरमा जिला जेल का मुख्य मार्ग—जहां से जिलाधिकारी, पुलिस अधीक्षक, न्यायाधीश समेत जनपद के तमाम आला हुक्मरान रोज़ाना गुजरते हैं—आज खुद अपने हाल पर रोता नजर आ रहा है। लोक निर्माण विभाग द्वारा कराए जा रहे सड़क निर्माण कार्य ने गुणवत्ता, पारदर्शिता और जवाबदेही—तीनों की पोल खोलकर रख दी है। सड़क बनते-बनते ही उखड़ने लगी है, जिससे यह सवाल उठने लगा है कि आखिर यह निर्माण है या खुलेआम जनता के पैसों की लूट?
स्थानीय लोगों का आरोप है कि सड़क निर्माण में मानकों को पूरी तरह ताक पर रख दिया गया है। मिट्टी युक्त पौन इंच गिट्टी का धड़ल्ले से इस्तेमाल हो रहा है। नियमानुसार आवश्यक तारकोल (बिटुमिन) का छिड़काव किए बिना ही भुनी गिट्टी बिछाकर रोलर चला दिया जा रहा है। गड्ढों की मरम्मत के नाम पर सिर्फ पौन इंच गिट्टी डालकर ऊपर से तारकोलिंग गिट्टी फैला दी जा रही है—मानो कागज़ों में सड़क चमकानी हो, जमीन पर नहीं।लोगों का कहना है कि ऐसी सड़क पहली ही तेज बारिश में बिखरकर बह जाएगी। ऊपर से ओवरलोड वाहनों की आवाजाही इस सड़क को जल्द ही धंसने पर मजबूर कर देगी। चौंकाने वाली बात यह है कि निर्माण कार्य अभी पूरा भी नहीं हुआ और कई स्थानों पर सड़क उखड़नी शुरू हो चुकी है, जिससे घटिया गुणवत्ता की सच्चाई सामने आ गई है।
आरोप है कि यह सब ठेकेदार और लोक निर्माण विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों की मिलीभगत से हो रहा है। लाखो की लागत से बन रही सड़क में जमकर लूट-खसोट की जा रही है, जबकि विभागीय अधिकारी आंख मूंदे बैठे हैं।न कोई निगरानी,न कोई सख्ती—मानो सब कुछ पहले से तय हो।सवाल यह भी है कि जब अधिकारियों के रोज़ाना आवागमन वाले मार्ग पर इतनी बड़ी अनियमितताएं की जा रही हैं, तो दूर-दराज़ के निर्माणाधीन मार्गों का हाल क्या होगा?स्थानीय नागरिकों में आक्रोश है। लोगों का कहना है कि यह सड़क नहीं, बल्कि भ्रष्टाचार की जीती-जागती मिसाल है। जनपद के आला अधिकारियों की निगाह इस ओर न जाना भी संदेह पैदा करता है। क्या जिम्मेदारों को सब कुछ दिख नहीं रहा, या फिर सब कुछ दिखते हुए भी अनदेखा किया जा रहा है?
अब सवाल यह है कि लोक निर्माण विभाग इस पर क्या जवाब देता है। क्या दोषियों पर कार्रवाई होगी या फिर यह सड़क भी अन्य सड़कों की तरह कुछ ही महीनों में गड्ढों में तब्दील होकर भ्रष्टाचार की कहानी बयां करती रहेगी? जनता जवाब चाहती है, और जिम्मेदारों की चुप्पी खुद बहुत कुछ कह रही है।
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