इलाहाबाद उच्च न्यायालय में ए.जी. ऑफिस चौराहे के सामने प्रस्तावित “अर्बन बाजार” को लेकर जनहित याचिका दायर की गई है। याचिकाकर्ताओं ने दावा किया है कि सरकारी कार्यालयों के सामने इस तरह के बाजार से पर्यावरण, यातायात और आम जनता के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
यह जनहित याचिका अधिवक्ता सुनीता शर्मा एवं अन्य की ओर से दाखिल की गई, जिसमें उत्तर प्रदेश सरकार सहित 9 पक्षकारों को प्रतिवादी बनाया गया है। मामले की सुनवाई माननीय न्यायमूर्ति महेश चंद्र त्रिपाठी एवं माननीय न्यायमूर्ति कुनाल रवि सिंह की खंडपीठ ने की।
याचिका में प्रतिवादी संख्या-9 द्वारा 15 अक्टूबर 2025 को जारी टेंडर नोटिस को निरस्त करने की मांग की गई है। साथ ही ए.जी. ऑफिस चौराहे के सामने किसी भी प्रकार का अर्बन बाजार स्थापित न करने का निर्देश देने की मांग भी की गई है।
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से उपस्थित अधिवक्ता ने PIL की सुनवाई योग्य होने पर प्रारंभिक आपत्ति उठाई। अदालत को बताया गया कि याचिका इलाहाबाद हाईकोर्ट नियमावली 1952 के अध्याय-22 के नियम 1(3-A) के तहत आवश्यक खुलासे एवं घोषणा के बिना दायर की गई है।
इसके बाद याचिकाकर्ताओं की ओर से आवश्यक शपथपत्र दाखिल करने के लिए समय मांगा गया, जिसे स्वीकार करते हुए अदालत ने मामले की सुनवाई स्थगित कर दी। अब यह मामला 25 मई 2026 को नए वाद के रूप में सूचीबद्ध किया जाएगा।
स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों का कहना है कि जिस तरह नोएडा सेक्टर 18 और अन्य व्यस्त इलाकों में सड़क किनारे अस्थायी बाजारों और ढांचों के कारण ट्रैफिक व अतिक्रमण की समस्या बढ़ी है, उसी प्रकार प्रयागराज में भी स्थिति बिगड़ने की आशंका जताई जा रही है। हालांकि, अंतिम निर्णय न्यायालय के आदेश और प्रशासनिक प्रक्रिया पर निर्भर करेगा।
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