नैतिक मूल्यों, आत्मविश्वास और चुनौतियों से निपटने की क्षमता सिखाते हैं शिक्षक
दैनिक समाज जागरण, ( महेन्द्र जावला बहल )
भिवानी, 5 सितम्बर। शिक्षक दिवस के अवसर पर नेताजी सुभाष चंद्र बोस युवा जागृत सेवा समिति एवं सदाचारी शिक्षा समिति भिवानी द्वारा महान शिक्षाविद, दार्शनिक और भारत के पूर्व राष्ट्रपति सर्वपल्ली डॉ. राधाकृष्णन को भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की गई। समिति के सदस्यों एवं शिक्षा और समाज से जुड़े प्रबुद्ध व्यक्तियों ने उनके विचारों को याद करते हुए स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण एवं नशा मुक्त समाज का संकल्प लिया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए राष्ट्रीय युवा पुरस्कार विजेता अशोक कुमार भारद्वाज, निदेशिका सावित्री यादव और समाजसेवी बिजेंद्र कुमार ने कहा कि डॉ. राधाकृष्णन का जीवन शिक्षकों और विद्यार्थियों दोनों के लिए प्रेरणास्रोत है। उन्होंने शिक्षा को केवल रोजगार प्राप्ति का साधन नहीं, बल्कि चरित्र निर्माण और समाज सेवा का माध्यम माना। वे मानते थे कि शिक्षक केवल पाठ्यक्रम पढ़ाने वाला नहीं, बल्कि समाज को दिशा देने वाला पथप्रदर्शक होता है।
डॉ. राधाकृष्णन ने अपने जीवन से यह सिद्ध किया कि एक शिक्षक को जीवनभर सीखते रहना चाहिए और विद्यार्थियों को केवल ज्ञान नहीं, बल्कि जीवन जीने की कला, नैतिक मूल्य और आत्मविश्वास भी देना चाहिए। वे राष्ट्रपति बनने के बाद भी स्वयं को पहले शिक्षक मानते रहे। जब छात्रों ने उनका जन्मदिन मनाने की इच्छा जताई, तो उन्होंने कहा, “यदि मेरा जन्मदिन शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाए, तो यह मेरे लिए सबसे बड़ा सम्मान होगा।” तभी से हर वर्ष 5 सितम्बर को शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाता है।
विद्यार्थियों के लिए डॉ. राधाकृष्णन का जीवन एक प्रकाशस्तम्भ की तरह है। उन्होंने संघर्षों के बीच शिक्षा प्राप्त की और भारतीय संस्कृति को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सम्मान दिलाया। वे मानते थे कि संघर्ष, अनुशासन और लगन से कोई भी विद्यार्थी सफलता प्राप्त कर सकता है।
इस अवसर पर शिक्षकों और समाजसेवियों ने एकमत होकर कहा कि शिक्षक दिवस केवल आभार प्रकट करने का दिन नहीं, बल्कि गुरु-शिष्य परंपरा की महत्ता को दोहराने और शिक्षा के क्षेत्र में नवाचार को प्रोत्साहित करने का अवसर भी है। इस मौके पर सामाजिक कार्यकर्ता अंजु शर्मा, सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।
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