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रेल सिविल डिफेंस ने लोको पायलटों को दिया आपदा प्रबंधन व प्राथमिक उपचार का प्रशिक्षण

दैनिक समाज जागरण 07.04.2026 चांद कुमार लायेक (ब्यूरो चीफ) पूर्वी सिंहभूम जमशेदपुर

जमशेदपुर इलेक्ट्रिक लोको पायलट ट्रेनिंग सेंटर में रेल सिविल डिफेंस की ओर से प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें आग लगने की स्थिति में त्वचा जलने के प्रकार, प्राथमिक उपचार और आपदा प्रबंधन के आधुनिक तरीकों की विस्तृत जानकारी दी गई। इस प्रशिक्षण में दक्षिण पूर्व रेलवे के चक्रधरपुर, खड़गपुर, रांची और आद्रा मंडल से लगभग 200 लोको पायलटों ने भाग लिया।


कार्यक्रम की शुरुआत रेल सिविल डिफेंस इंस्पेक्टर संतोष कुमार ने की। उन्होंने लोको पायलटों को अपने कर्तव्यों के प्रति समर्पित रहने और राष्ट्रीय भावना के साथ कार्य करने के लिए प्रेरित किया। साथ ही सभी को आपदा के समय तत्परता से कार्य करने की शपथ भी दिलाई गई।


प्रशिक्षण के दौरान आग से झुलसने की स्थिति को चार श्रेणियों में समझाया गया। फर्स्ट डिग्री बर्न में त्वचा की ऊपरी परत प्रभावित होती है और त्वचा लाल हो जाती है। सेकंड डिग्री बर्न में त्वचा की ऊपरी व निचली दोनों परतें प्रभावित होती हैं, जिससे फफोले और तेज दर्द होता है। थर्ड डिग्री बर्न में त्वचा की सभी परतें नष्ट हो जाती हैं और नसें भी प्रभावित होती हैं, जबकि चौथी डिग्री बर्न अत्यंत गंभीर होती है, जिसमें जलन मांसपेशियों से होते हुए हड्डियों तक पहुंच जाती है।


प्राथमिक उपचार के बारे में बताते हुए संतोष कुमार ने कहा कि फर्स्ट डिग्री बर्न में प्रभावित हिस्से को 10 से 15 मिनट तक ठंडे पानी में रखना चाहिए। सेकंड डिग्री बर्न में छोटे छालों पर एंटीबायोटिक क्रीम लगाकर साफ पट्टी बांधनी चाहिए। वहीं थर्ड और चौथी डिग्री बर्न की स्थिति में संक्रमण का खतरा अधिक होता है, इसलिए ऐसे मरीजों को तुरंत अस्पताल पहुंचाना आवश्यक है।
इस दौरान “रूल ऑफ नाइन” के माध्यम से जलने की गंभीरता का आकलन करना भी सिखाया गया। उन्होंने बताया कि यदि शरीर का 40 प्रतिशत से अधिक हिस्सा जल जाता है, तो स्थिति अत्यंत गंभीर मानी जाती है। इसी प्रतिशत के आधार पर मुआवजे का निर्धारण भी किया जाता है।


प्रशिक्षण डिजिटल बोर्ड और पावर प्वाइंट प्रेजेंटेशन के माध्यम से दिया गया, जिससे प्रतिभागियों को विषय को समझने में आसानी हुई। कार्यक्रम के द्वितीय चरण में डेमोंस्ट्रेटर शंकर कुमार प्रसाद ने फायर उपकरणों के सुरक्षित उपयोग, सावधानियों, सीपीआर, हेमलिच मेनूवर, टो ड्रैग, ब्लैंकेट ड्रैग और मैन-मेड स्ट्रेचर तैयार करने की विधियों का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया। मॉक ड्रिल के जरिए सभी प्रतिभागियों को वास्तविक परिस्थितियों के लिए तैयार किया गया।


प्रशिक्षण के अंत में लोको पायलटों ने सिविल डिफेंस टीम द्वारा आधुनिक और व्यावहारिक तरीके से दिए गए प्रशिक्षण की सराहना की। यह कार्यक्रम आपदा के समय त्वरित और प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।


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