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9.87 करोड़ की योजना के बावजूद बदहाल रमजान नदी, गंदे पानी में हुआ मां दुर्गा की प्रतिमाओं का विसर्जन

पूजा पर लाखों-करोड़ों खर्च, मां की विदाई के लिए स्वच्छ घाट तक नहीं! सामने छठ महापर्व, सौंदर्यीकरण के दावों पर सवाल

वीरेंद्र चौहान, समाज जागरण ब्यूरो, किशनगंज।
किशनगंज शहर की रमजान नदी की बदहाली ने 9.87 करोड़ रुपये की सौंदर्यीकरण योजना और प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। बुधवार को रमजान नदी के घाटों पर मां दुर्गा की प्रतिमाओं का विसर्जन गंदे पानी में किया गया। जिस मां की आराधना श्रद्धालु नौ दिनों तक पूरी श्रद्धा और भक्ति से करते हैं तथा जिनकी पूजा और भव्य आयोजन पर लाखों रुपये खर्च किए जाते हैं, उनकी विदाई के समय स्वच्छ घाट तक उपलब्ध नहीं होना व्यवस्था की गंभीर खामी को उजागर करता है। अब सामने छठ महापर्व है, जब इसी नदी के घाटों पर व्रती भगवान सूर्य को अर्घ्य अर्पित करेंगे। ऐसे में सवाल उठता है कि करोड़ों रुपये की योजना स्वीकृत होने के बावजूद रमजान नदी की बदहाली दूर क्यों नहीं हुई? क्या जिम्मेदार विभाग केवल निर्माण कार्यों तक ही सीमित हैं?

मां की पूजा में अपार श्रद्धा, विसर्जन के समय व्यवस्था बदहाल

दुर्गा पूजा हिंदू आस्था का प्रमुख पर्व है। श्रद्धालु मां दुर्गा की आराधना के लिए भव्य पंडाल सजाते हैं और पूजा-अनुष्ठानों पर बड़ी राशि खर्च करते हैं। इसके बावजूद विसर्जन के समय गंदे पानी की स्थिति धार्मिक आयोजनों की तैयारियों पर सवाल खड़े करती है। श्रद्धालुओं की आस्था का सम्मान केवल पूजा के दौरान सुरक्षा व्यवस्था करने से नहीं, बल्कि प्रतिमा विसर्जन के लिए स्वच्छ और व्यवस्थित घाट उपलब्ध कराने से भी होता है। आखिर पहले से तैयारियों के बावजूद घाटों की सफाई सुनिश्चित क्यों नहीं की गई?

करोड़ों की योजना, फिर भी नदी की सूरत क्यों नहीं बदली?

रमजान नदी के सौंदर्यीकरण के तहत ढेकसरा पुल से मझियां तक करीब 9.5 किलोमीटर क्षेत्र में सर्विस रोड, पेवर ब्लॉक सड़क और छठ घाटों के निर्माण की योजना बनाई गई थी। लेकिन नदी में गंदगी और सिकुड़ती जलधारा की स्थिति योजना के क्रियान्वयन और रखरखाव पर सवाल उठाती है। सड़क और घाट का निर्माण ही सौंदर्यीकरण की सफलता का पैमाना नहीं हो सकता। जब नदी का पानी गंदा रहे और धार्मिक आयोजनों के दौरान भी सफाई की समस्या बनी रहे, तो योजना के वास्तविक लाभ की समीक्षा जरूरी है।

छठ महापर्व से पहले सफाई की चुनौती

दुर्गा प्रतिमा विसर्जन के बाद अब छठ महापर्व सामने है। इस पर्व में व्रती नदी के पानी में खड़े होकर अस्ताचलगामी और उदीयमान सूर्य को अर्घ्य अर्पित करते हैं। ऐसे में नदी की स्वच्छता श्रद्धालुओं की सुविधा, जनस्वास्थ्य और धार्मिक आस्था से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय है।
प्रशासन को तत्काल सफाई अभियान चलाकर घाटों से कचरा हटाना चाहिए। साथ ही गंदे पानी के प्रवाह के स्रोतों की पहचान कर आवश्यक कार्रवाई करनी चाहिए। केवल अस्थायी सजावट और रोशनी की व्यवस्था पर्याप्त नहीं होगी; श्रद्धालुओं को स्वच्छ और सुरक्षित घाट उपलब्ध कराना भी जरूरी है।

अतिक्रमण और निर्माण की गुणवत्ता की हो जांच

रमजान नदी की सिकुड़ती जलधारा, कथित अतिक्रमण और प्रदूषण को लेकर उठ रहे सवालों पर संबंधित विभाग को स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। नदी की वास्तविक चौड़ाई का सीमांकन, अतिक्रमण की जांच और प्रदूषण रोकने के लिए ठोस कार्ययोजना तैयार करना जरूरी है।
जुलाई में भारी बारिश के बाद सौंदर्यीकरण कार्य के कुछ हिस्सों को नुकसान पहुंचने की खबरों के मद्देनजर निर्माण की गुणवत्ता और रखरखाव की भी जांच होनी चाहिए। विभाग को योजना की वर्तमान स्थिति, खर्च की गई राशि, अधूरे कार्यों और सफाई की जिम्मेदारी के संबंध में जानकारी सार्वजनिक करनी चाहिए।

अब दावों से नहीं, कार्रवाई से बदलेगी तस्वीर

9.87 करोड़ रुपये की योजना का उद्देश्य तभी सार्थक होगा, जब रमजान नदी स्वच्छ हो और श्रद्धालुओं को साफ घाट उपलब्ध हों। दुर्गा प्रतिमा विसर्जन के दौरान सामने आई स्थिति के बाद छठ महापर्व से पहले व्यवस्था दुरुस्त करना प्रशासन की प्राथमिकता होनी चाहिए।

सवाल सीधा है—जब मां दुर्गा की पूजा पर श्रद्धालु लाखों रुपये खर्च करते हैं और पूरी श्रद्धा से उनकी आराधना करते हैं, तो विसर्जन के लिए स्वच्छ घाट की व्यवस्था क्यों नहीं हो पाती? करोड़ों रुपये की योजना के बावजूद नदी की बदहाली दूर नहीं होना संबंधित विभागों की जवाबदेही तय करने की मांग करता है।
अब जरूरत आश्वासन की नहीं, धरातल पर ठोस कार्रवाई की है। प्रशासन को छठ से पहले नदी और घाटों की सफाई सुनिश्चित करने के साथ प्रदूषण और अतिक्रमण की समस्या के स्थायी समाधान की दिशा में प्रभावी कदम उठाने चाहिए।


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