एक सैनिक का काम अपने राष्ट्र और अपने नागरिकों की गरिमा की रक्षा करने का होता है, यह कहते हुए केरल हाईकोर्ट ने एक 13 वर्षीय लड़के के साथ कुकर्म करने वाले सैनिक की जमानत याचिका खारिज करते हुए यह टिप्पणी की है. जस्टिस सोफी थॉमस ने कहा कि चूंकि जमानत मांगने वाला याचिकाकर्ता एक सैनिक है, इसलिए उसके खिलाफ आरोपों को गंभीरता से देखने की जरूरत है.
जस्टिस थॉमस ने जमानत याचिका को खारिज करते हुए आदेश में कहा है कि एक सैनिक होने के नाते, याचिकाकर्ता के खिलाफ आरोपों को और अधिक गंभीरता से देखा जाना चाहिए. वह राष्ट्र की रक्षा करने वाला है और नागरिकों की गरिमा और अखंडता की रक्षा करना उसका काम है. कोर्ट ने कहा कि आरोप अगर साबित होता है, तो अश्लीलता होगी और यह आरोप एक जिम्मेदार सैन्य अधिकारी पर होंगे.
क्या है सैनिक पर आरोप
हाईकोर्ट ने कहा कि इसलिए यह अदालत अभी याचिकाकर्ता को जमानत पर छोड़ने के लिए इच्छुक नहीं है. आरोपी सैनिक (जमानत याचिका दाखिल करने वाला) पर आरोप है कि उसने एक 13 वर्षीय लड़के को पैसे देकर उसे साथ यौन संबंध बनाने के लिए राजी किया है. इसके बाद में सैनिक को द प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रन फ्रॉम सेक्सुअल ऑफेंस एक्ट (POCSO ACT) के तहत बुक किया गया था.
मामले की जांच अभी पूरी नहीं हुई है: अभियोजन पक्ष
सैनिक ने तर्क दिया कि वह अपने परिवार और पीड़ित लड़के के बीच एक पुराने विवाद के कारण मामले में गलत तरीके से फंसाया गया है. वहीं अभियोजन पक्ष ने दलील दी कि इस मामले की जांच अभी पूरी नहीं हुई है. यह तर्क दिया गया कि यदि आरोपी सैनिक जमानत पर रिहा हो जाता है, तो यह जांच पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है और पीड़ित लड़के की सुरक्षा को भी प्रभावित कर सकता है. इन सब जिरह को सुनने के बाद हाईकोर्ट ने सैनिक की जमानत याचिका को खारिज कर दिया है.
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