- याचिका खारिज कर हाई कोर्ट ने दिए हैं प्रोफेसर विनय पाठक की गिरफ्तारी के आदेश
- करोड़ों के भ्रष्टाचार के आरोपी है कानपुर यूनिवर्सिटी के वीसी विनय पाठक
- 1.50 करोड़ रुपए की कमीशन लेने का आरोप
सुनील बाजपेई
कानपुर। यहां यूनिवर्सिटी के कुलपति विनय पाठक को गिरफ्तारी से बचाने के लिए उनके कई चहेते नेता और कतिपय अधिकारी भी सक्रिय हो गये हैं। उनकी गिरफ्तारी के यह आदेश संबंधित जांच एजेंसी को हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने दिए ,जिसके बाद करोड़ों रुपए के भ्रष्टाचार के आरोपी कुलपति विनय पाठक की मुश्किलें और बढ़ गई हैं।
अवगत कराते चलें कि उन्होंने गिरफ्तारी से बचने के लिए याचिका भी दायर की थी, जिसे खारिज करने के साथ ही उनकी गिरफ्तारी का आदेश भी दिया गया है। यही वजह है कि उनके समर्थक राजनेता और अधिकारी भी बहुत परेशान हैं। और वे करोड़ों के भ्रष्टाचार के आरोपी यूनिवर्सिटी के कुलपति विनय पाठक को गिरफ्तारी से बचाने के लिए हर संभव प्रयास में जुट गए हैं ।
सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक संबंधित जांच एजेंसी ने जिस कारण की तैयारियां की हैं। उसके मुताबिक कुल पद विनय पाठक की गिरफ्तारी कभी भी की जा सकती है।
जानकारी के मुताबिक, हाल ही में न्यायमूर्ति राजेश सिंह चौहान और न्यायमूर्ति विवेक कुमार सिंह की खंडपीठ ने अपना फैसला सुरक्षित कर लिया था, जिसकी सुनवाई 15 नवंबर को होनी थी। कल मंगलवार को उनकी सुनवाई करते हुए कोर्ट ने कानपुर यूनिवर्सिटी के वीसी विनय पाठक की याचिका को खारिज कर दिया है।
इस मामले में आरोपी विनय पाठक की ओर से वरिष्ठ वकील एलपी मिश्र और सरकार की तरफ से वरिष्ठ वकील जयदीप माथुर और विनोद शाही ने बहस की थी।
कानपुर यूनिवर्सिटी के कुलपति विनय पाठक का यह पूरा मामला आगरा यूनिवर्सिटी में टेंडर के बदले कमीशनखोरी के मामले से जुड़ा हुआ है।
इस मामले में प्रो. विनय पाठक पर जबरन बंधक बनवाकर पैसे वसूलने का भी आरोप है। पीड़ित की माने तो इन्होंने अजय मिश्रा के साथ मिलकर कई अन्य बिलों को पास करने के नाम पर पीड़ित से रुपए वसूलते रहे।
साथ ही यह भी आरोप है कि अजय मिश्रा ने इंटरनेशनल बिजनेस फार्म्स अलवर राजस्थान के खाते में करीब 73 लाख रुपये भी ट्रांसफर करवाएं थे। पीड़ित के मुताबिक, अब तक उससे करीब 1.50 करोड़ रुपए की कमीशन ली गई है। साथ ही इस मामले की जांच एसटीएफ से भी कराई जा रही है। यहीं नहीं प्रो पाठक प्रवर्तन निदेशालय की रडार पर भी हैं।
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