शहडोल, 13 अक्टूबर 2026।
तहसील जयसिंहनगर के ग्राम अमझोर में खसरा नंबर 179 की भूमि को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। आवेदिका श्रीमती रमा सिंह पति रुद्र प्रताप सिंह ने तहसीलदार जयसिंहनगर को दिए आवेदन में आरोप लगाया है कि शासकीय भूमि घोषित हो चुकी जमीन पर याचिकाकर्ता चंद्रमा प्रसाद तिवारी द्वारा अवैध रूप से पेट्रोल पंप का निर्माण कराया जा रहा है।
आवेदिका के अनुसार अपर कलेक्टर शहडोल ने आदेश दिनांक 16 दिसंबर 2025 को खसरा नंबर 179 की भूमि को मध्यप्रदेश शासन के नाम दर्ज करने का आदेश दिया था। इस आदेश के विरुद्ध चंद्रमा प्रसाद तिवारी ने माननीय उच्च न्यायालय जबलपुर में M.P. No. 541/2026 दायर की है, जिसमें दिनांक 30 जनवरी 2026 को स्टेटस-को का आदेश पारित हुआ था।
स्टे के बाद भी निर्माण का आरोप
आवेदिका ने उच्च न्यायालय में दिनांक 22 मार्च 2026 को Return दाखिल कर स्टे हटाने का आवेदन भी दिया है, जिसके साथ R-1 फोटोग्राफ संलग्न हैं। उनका आरोप है कि उक्त स्टे आदेश के बाद भी याचिकाकर्ता द्वारा लगातार निर्माण कर जमीन का स्वरूप बदला जा रहा है।
आवेदन में कहा गया है कि खसरा नंबर 179 पर किया जा रहा पेट्रोल पंप निर्माण शासकीय भूमि पर किया जा रहा है, जिसकी लागत 1 करोड़ रुपये से अधिक बताई गई है। आवेदिका का कहना है कि यह निर्माण म.प्र. भू-राजस्व संहिता की धारा 248 का उल्लंघन है।
मूल नस्ती गायब, पात्रता पर सवाल
मामले का सबसे अहम पहलू पट्टे की मूल नस्ती का गायब होना है। आवेदिका के अनुसार केस नंबर 202/A-19(4)/1992-93 की मूल नस्ती तहसील रिकॉर्ड में उपलब्ध नहीं है, जिसकी जानकारी तहसील कार्यालय द्वारा पहले भी दी जा चुकी है। आवेदिका ने इसे पट्टा शुरू से ही अमान्य बताया है।
साथ ही आवेदिका ने आरोप लगाया है कि याचिकाकर्ता के पिता जमुना प्रसाद के नाम ग्राम अमझोर में 1982-83 से ही 10.40 एकड़ भूमि दर्ज थी, ऐसे में वे 1984 के भूमिहीन पात्रता के तहत अपात्र थे।
आवेदिका ने यह भी कहा है कि याचिकाकर्ता ने एक ही आदेश के विरुद्ध दोहरी कार्यवाही करते हुए बोर्ड ऑफ रेवेन्यू ग्वालियर में भी 06 जनवरी 2026 को अपील दायर की है।
तहसीलदार से पंचनामा की मांग
रमा सिंह ने 08 अक्टूबर 2026 को तहसीलदार जयसिंहनगर को दिए आवेदन में प्रार्थना की है कि राजस्व निरीक्षक/पटवारी को मौके पर भेजकर स्टे आदेश के बाद हुए निर्माण का पंचनामा तैयार कराया जाए, शासकीय भूमि पर हो रहे अवैध निर्माण को तत्काल रोका जाए और धारा 248 के तहत कार्यवाही की जाए। साथ ही पंचनामा रिपोर्ट की एक प्रति उन्हें उपलब्ध कराई जाए ताकि उसे दिनांक 22 अक्टूबर 2026 को हाईकोर्ट में प्रस्तुत किया जा सके।
अब सबकी नजर 22 अक्टूबर 2026 को होने वाली सुनवाई पर है, जिसमें स्टे हटाने के आवेदन पर बहस होनी है।
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