Sonbhadra News: सहारा हॉस्पिटल में महिला की संदिग्ध मौत, परिजनों ने लगाया गलत इंजेक्शन और लापरवाही का आरोप

समाज जागरण | ब्यूरो चीफ सोनभद्र

सोनभद्र (उत्तर प्रदेश): जनपद के रॉबर्ट्सगंज कोतवाली क्षेत्र स्थित सहारा हॉस्पिटल एंड सर्जिकल सेंटर में भर्ती एक 27 वर्षीय महिला की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो जाने के बाद बुधवार को अस्पताल परिसर में जमकर हंगामा हुआ। मृतका के परिजनों ने अस्पताल प्रशासन और चिकित्सकों पर गंभीर लापरवाही, समय पर इलाज न देने और गलत इंजेक्शन लगाने का आरोप लगाया है। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति को नियंत्रित करते हुए मामले की जांच शुरू कर दी।

📍 कैसे हुई घटना?

प्राप्त जानकारी के अनुसार केकराही क्षेत्र के बसवान गांव निवासी रुक्मिणी पटेल (27), पत्नी जितेंद्र पटेल, को पेट दर्द और उल्टी की शिकायत के बाद परिजन उक्त निजी अस्पताल में भर्ती कराए थे। परिजनों का कहना है कि भर्ती के समय महिला पूरी तरह सामान्य थी और बातचीत कर रही थी। उसे कोई गंभीर बीमारी नहीं थी।

⚠️ परिजनों के गंभीर आरोप

मृतका के पति जितेंद्र पटेल के अनुसार अस्पताल में इलाज के नाम पर सिर्फ ड्रिप (पानी में दवा मिलाकर) चढ़ाई जाती रही, लेकिन हालत बिगड़ने के बावजूद न तो कोई विशेषज्ञ डॉक्टर बुलाया गया और न ही मरीज को किसी बड़े अस्पताल के लिए रेफर किया गया।

परिजनों का आरोप है कि रात के समय अचानक महिला की हालत गंभीर होने लगी। जब डॉक्टर को बुलाने की कोशिश की गई तो अस्पताल में कोई डॉक्टर मौजूद नहीं मिला। इसी दौरान इलाज के नाम पर महिला को एक इंजेक्शन लगाया गया, जिसके बाद उसकी स्थिति और बिगड़ गई।

🚨 सुबह ICU ले जाने के बाद मौत

बताया जा रहा है कि सुबह करीब 6 बजे अस्पताल स्टाफ महिला को आईसीयू में लेकर गया, जहां उसे मृत घोषित कर दिया गया। घटना के बाद अस्पताल कर्मियों के मौके से हट जाने की बात भी सामने आई, जिससे परिजनों का आक्रोश और बढ़ गया।

😢 परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़

महिला की मौत से परिवार में कोहराम मच गया है। मृतका अपने पीछे तीन छोटी बच्चियों को छोड़ गई है, जिनमें एक मात्र पांच महीने की दुग्धमुंही बच्ची भी शामिल है। मां के निधन के बाद बच्चियों का रो-रोकर बुरा हाल है और परिजनों के सामने उनके पालन-पोषण की गंभीर समस्या खड़ी हो गई है।

🏥 अस्पताल प्रशासन का पक्ष

वहीं अस्पताल कर्मचारियों ने परिजनों के आरोपों को नकारते हुए कहा कि मरीज की हालत पहले से सामान्य थी और उसका उपचार किया जा रहा था। कर्मचारियों के अनुसार परिजनों द्वारा पानी पिलाने के दौरान पानी फेफड़ों में चला गया, जिससे उसकी स्थिति अचानक गंभीर हो गई। अस्पताल पक्ष का कहना है कि मरीज का अल्ट्रासाउंड होना बाकी था और उसे निगरानी में रखा गया था।

👮 पुलिस जांच में जुटी

घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति को नियंत्रित किया। पुलिस का कहना है कि मामले में तहरीर मिलने के बाद विधिक कार्रवाई की जाएगी। साथ ही पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद मौत के वास्तविक कारणों का खुलासा हो सकेगा।


🔎 निष्कर्ष

यह मामला फिलहाल संदेह और आरोप-प्रत्यारोप के बीच उलझा हुआ है। एक तरफ परिजन इसे स्पष्ट रूप से चिकित्सा लापरवाही और गलत इलाज का मामला बता रहे हैं, वहीं अस्पताल प्रबंधन इसे आकस्मिक स्थिति बता रहा है। अब सबकी नजर पुलिस जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट पर टिकी है, जो इस पूरे मामले की सच्चाई सामने ला सकती है।

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