ब्यूरो चीफ/ समाज जागरण
सोनभद्र। बिल्ली मारकुंडी स्थित कृष्णा माइनिंग खदान में हुए हादसे के बाद कई बड़े खुलासे हुए हैं। जांच में सामने आया है कि यह खदान कई प्रभावशाली लोगों की साझेदारी में संचालित हो रही थी। खदान का सबसे बड़ा हिस्सा एक घोषित पट्टाधारक के नाम था, लेकिन अन्य लोग भी इसमें हिस्सेदार के रूप में जुड़े हुए थे। जांच में यह भी सामने आया है कि खदान को सिंडिकेट बनाकर चलाया जा रहा था। इसमें दर्जन भर प्रभावशाली लोग शामिल थे। खदान वर्ष 2016 से सक्रिय थी और नियमों की अनदेखी कर साझेदारी में चलाई जा रही थी।
हादसे के बाद प्रशासन और खनन विभाग की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं। जांच दल इस बात पर भी गौर कर रहे हैं कि खदान सुरक्षा नियमावली की अनदेखी के साथ-साथ यह अवैध संचालन इतने वर्षों तक बिना किसी रोक-टोक के कैसे चलता रहा। बिल्ली मारकुंडी खदान हादसे में 5 मजदूरों की मौत हो गई थी। इस घटना के बाद माइंस संचालक सहित 3 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है और पुलिस उनकी तलाश कर रही है। जिलाधिकारी बद्रीनाथ सिंह ने बताया कि बचाव कार्य अपने अंतिम चरण में है और जल्द ही आखिरी शव को भी बाहर निकाल लिया जाएगा।
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