शिक्षक दिवस: हमारे जीवन को नई दिशा व दशा प्रदान करने वाले शिक्षकों के सम्मान में, उनके प्रति आभार व्यक्त करने का दिवस है: निर्भय सिंह

अभय कुमार पटेल/ समाज जागरण

सोनभद्र। आज शिक्षक दिवस है यह शिक्षक दिवस हमारे जीवन को नई दिशा एवं दशा प्रदान करने वाले शिक्षकों के सम्मान में, एवं उनके प्रति आभार व्यक्त करने का दिवस है। यदि हम ‘शिक्षक’ की बात करें, तो यह एक छोटा सा शब्द मात्र है, परन्तु इसका अर्थ अत्यंत व्यापक है। शिक्षक शब्द तीन अक्षरों से मिलकर बना है, शि का अर्थ होता है – शिखर तक ले जाने वाला, क्ष अर्थात् क्षमा की भावना रखने वाला, तथा क का अर्थ होता है – कमजोरी का निदान करने वाला। इस प्रकार हम शिक्षक शब्द की व्याख्या करते हैं, तो यह कहना बिल्कुल गलत नहीं होगा, कि “शिक्षक वह व्यक्ति है, जो हमारी कमज़ोरी का निदान कर, क्षमा भाव के साथ जीवन के उच्चतम शिखर तक पहुंचने का मार्ग प्रशस्त करता है।”
शिक्षक न सिर्फ़ बालक को अंधकार से निकाल कर उज्ज्वल भविष्य का मार्ग प्रदर्शित करता है, बल्कि वह उसे गर्त से निकाल कर आसमान सी ऊंचाइयां छूने में मदद करता है।
शिक्षक उस पारसमणि की भांति होता है, जो बालक के पत्थर रूपी मस्तिष्क को अपने स्पर्श मात्र से स्वर्ण में परिवर्तित करने का हुनर रखता है।
इस दिवस को मनाने की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि पर यदि ध्यान आकृष्ट किया जाए, तो हम पाते हैं कि डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन, जो कि एक अद्भुत शिक्षक थे, 1962 में भारत के राष्ट्रपति बने, तो उनके सहयोगियों, अधिकारियों व पूर्व छात्रों ने उनके जन्मदिवस को मनाने की इच्छा प्रकट की। इस पर उन्होंने अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा, कि यदि आप सब मेरा जन्मदिवस मनाना ही चाहते हैं, तो इसे राष्ट्र को समर्पित सभी शिक्षकों के योगदान के रूप में मनाइए, जिससे हमारे सभी शिक्षक सम्मानित हो सकें। तभी से प्रतिवर्ष 5 सितंबर को पूरे भारतवर्ष में राष्ट्रीय शिक्षक दिवस मनाया जाने लगा।
आजकल के परिवेश को देखते हुए यह महसूस भी किया गया कि पीढ़ी-दर-पीढ़ी छात्रों में शिक्षकों के प्रति सम्मान की भावना में वृद्धि हेतु यह आवश्यक भी था। प्रायः देखा जा रहा है कि आजकल कुछ शिक्षकों के प्रति न तो वह सम्मान अर्पित हो रहा है और न ही वे इसे पाने की योग्यता रख पा रहे हैं। कहा जाता है कि शिक्षक ज्ञान देने के साथ-साथ बालकों में नैतिक मूल्यों का निर्माता भी होता है, परन्तु आजकल के कुछ तथाकथित शिक्षक स्वयं नैतिकता का हनन करते देखे जा रहे हैं। शिक्षकों में नैतिकता की कमी समाज को पतन की ओर धकेलने में कोई कसर नहीं छोड़ती। यही कारण है कि हमारी युवा पीढ़ी, जिसे हम Gen-Z के नाम से जानते हैं, शिक्षकों के अस्तित्व, उनके महत्त्व को समझने में असमर्थ है। शिक्षकों की महत्वाकांक्षा में कमी का एक कारण कहीं न कहीं सोशल मीडिया साइटों पर बच्चों की उपस्थिति भी है, जो उन्हें शिक्षकों के स्नेह, उनके प्रेम से वंचित कर रही है।
इस बदलते दौर में इसीलिए शिक्षक दिवस मनाने की नितान्त आवश्यकता है, जिससे हमारी भावी पीढ़ी शिक्षकों की महत्ता, एवं देश समाज के प्रति उनके योगदान को समझ सके और उन्हें सम्मान देने के साथ-साथ उनके प्रति अपना आभार प्रकट कर सके।
शिक्षकों के इस योगदान को मैं स्वरचित पंक्तियों से नमन करता हूं।
आप हमें लड़ने के लिए शस्त्र और शास्त्र देते हैं।
आप ही हैं, जो हमें ज्ञान रूपी ब्रह्मास्त्र देते हैं।
आप ही करते हैं, हमारी कठिनाइयों का दमन
इसलिए हे शिक्षक! आप को मेरा कोटि-कोटि नमन।।

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