वीरेंद्र चौहान, समाज जागरण ब्यूरो, किशनगंज।
01 फरवरी 2026: बदलते खानपान और जीवनशैली के चलते डायबिटीज अब केवल बुजुर्गों तक सीमित नहीं रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि ठंड के मौसम में यह समस्या और गंभीर हो जाती है। सुस्ती, कम व्यायाम और अधिक कैलोरी वाले भोजन के कारण ब्लड शुगर तेजी से बढ़ सकता है।
सिविल सर्जन डॉ. राज कुमार चौधरी ने बताया कि ठंड के मौसम में शरीर की ऊर्जा खपत कम हो जाती है, जिससे ब्लड शुगर बढ़ने का खतरा अधिक हो जाता है। उन्होंने कहा कि इस समस्या से बचने का सबसे प्रभावी तरीका है नियमित जांच, संतुलित खानपान और अनुशासित दिनचर्या।
संतुलित खानपान और नियमित दिनचर्या जरूरी
डॉ. चौधरी के अनुसार, मधुमेह रोगियों को भोजन का समय न टालना चाहिए। हल्का और पौष्टिक भोजन दिन में तीन-चार बार करना लाभकारी होता है। विशेष रूप से ठंड के मौसम में सुबह का नाश्ता सूर्योदय के बाद जल्द करना चाहिए। नाश्ते में दलिया, खिचड़ी, अंकुरित अनाज, दूध, फल और हरी सब्जियां शामिल करना चाहिए। वहीं, तली-भुनी और अधिक मीठी चीजों से परहेज करना अनिवार्य है।
उन्होंने बताया कि ठंड में शरीर की गतिशीलता कम हो जाती है और लोग अधिक कैलोरी वाले भोजन की ओर झुकते हैं, जिससे ब्लड शुगर तेजी से बढ़ सकता है। इसलिए व्यायाम और हल्की सक्रियता को नियमित दिनचर्या का हिस्सा बनाना बेहद जरूरी है।
ग्रामीण क्षेत्रों में बढ़ रहा खतरा
जिले में अधिकतर डायबिटीज के मरीज ग्रामीण इलाकों और मध्यम वर्ग के लोग हैं। जागरूकता की कमी और समय पर जांच न होने के कारण बीमारी अक्सर देर से पकड़ में आती है। ठंड में मरीजों द्वारा हल्के लक्षणों को सामान्य कमजोरी मान लेना भी खतरे को बढ़ाता है।
डॉ. चौधरी ने कहा कि ग्रामीण इलाकों में लोगों को नियमित जांच और खानपान पर विशेष ध्यान देने की सलाह देना आवश्यक है। लोगों में जागरूकता बढ़ाने के लिए स्थानीय स्वास्थ्य केंद्रों और स्वयंसेवी संगठनों की भूमिका अहम होती है।
जिला स्वास्थ्य विभाग की पहल
किशनगंज जिला स्वास्थ्य विभाग 30 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों की नियमित स्क्रीनिंग कर रहा है। सदर अस्पताल, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और हेल्थ एंड वेलनेस सेंटरों पर प्रतिदिन सैकड़ों लोगों की जांच और नि:शुल्क चिकित्सीय परामर्श उपलब्ध कराया जा रहा है।
डॉ. चौधरी ने बताया कि यह पहल खासकर ग्रामीण और मध्यम वर्ग के लोगों के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि समय पर जांच और उचित परामर्श से डायबिटीज के गंभीर असर को रोका जा सकता है।
सतर्कता ही बचाव का उपाय
विशेषज्ञों का कहना है कि ठंड में भी सक्रिय रहना, नियमित टहलना, धूप लेना और खानपान पर ध्यान रखना सबसे बड़ा बचाव है। इसके अलावा समय-समय पर ब्लड शुगर की जांच और चिकित्सकीय सलाह का पालन करना जरूरी है।
डॉ. चौधरी ने आम लोगों से अपील की कि वे घरों में ही बैठे रहने की आदत न डालें। हल्का व्यायाम, योग और सुबह की सैर ब्लड शुगर को नियंत्रित रखने में मददगार है। उन्होंने कहा कि बच्चों और युवाओं को भी सही खानपान और शारीरिक सक्रियता की आदत डालना चाहिए ताकि भविष्य में उन्हें डायबिटीज जैसी गंभीर बीमारी का खतरा कम हो।
डॉ. चौधरी के अनुसार, डायबिटीज केवल उम्रदराज लोगों की समस्या नहीं है। युवा और बच्चों में भी यह बढ़ती जा रही है। ठंड और जीवनशैली में बदलाव इसे और गंभीर बनाते हैं। इसलिए समय पर जागरूकता, संतुलित आहार, सक्रिय जीवनशैली और नियमित जांच ही सुरक्षित रास्ता है।
निष्कर्ष
ठंड के मौसम में डायबिटीज का खतरा केवल बुजुर्गों तक सीमित नहीं है। बदलते खानपान, कम सक्रियता और अधिक कैलोरी वाले भोजन के कारण यह बीमारी तेजी से बढ़ रही है।
जिला स्वास्थ्य विभाग की नियमित स्क्रीनिंग, स्वास्थ्य केंद्रों में नि:शुल्क परामर्श और विशेषज्ञों की सलाह इस समस्या को नियंत्रित करने में अहम भूमिका निभा रही है।
सतर्कता, नियमित जांच और अनुशासित जीवनशैली ही इस बीमारी से बचने का सबसे प्रभावी उपाय है।
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