दुबे परिवार नरवार में बह रही श्री मद भागवत की रस धारा

धर्म स्थापना के लिए विभिन्न स्वरूपों में अवतार लेते हैं प्रभु

उमरिया — श्री मद भागवत कथा के पांचवे दिवस के अवसर पर भगवान कृष्ण के जन्म अवतार से लेकर कंस उद्धार की कथा का वर्णन करते हुए कहा व्यास जी के स्थान पर विराजित भागवताचार्य पं मानवेंद्र जी ने कहा कि मथुरा के राजा कंस अनाचारी था, जो की प्रजा के साथ अत्याचार करते हुए अपने पिता उग्रसेन, बहन देवकी पति वसुदेव को कारावास में डाल कर रखा था, देवकी के सात पुत्रों को मार दिया था, तब भगवान विष्णु देवकी नंदन के रूप में अवतार लिया, जिन्हें मारने के लिए अथक प्रयास किया और षडयंत्र करते हुए मेले के बहाने कृष्ण, बलराम को मथुरा आमंत्रित कर षड्यंत्र पूर्वक उनका वध करना चाहता था , लेकिन कंस ऐसा कर नहीं सका और भगवान कृष्ण ने ही आतातायी कंस का उद्धार कर दिया।

कारावास में कैद उग्रसेन, देवकी, और वसुदेव को मुक्त कर दिया गया। उग्रसेन को मथुरा के राज्य सिंहासन पर बैठा दिया मथुरा को धर्ममयी बना दिया , तत्पश्चात् भागवताचार्य मानस रस मर्मज्ञ ने प्रभु लीला के अगले सोपान भागवत के दशवे स्कंध के 53 और 54 अध्याय का बखान करते हुये सप्त पदी रूक्मिणी के लिखे पत्र का श्री मुखारविंद से शास्तीय विधा से उच्चारण करते हुए उसका विस्तार से भावार्थ बतलाया। मानस मर्मज्ञ ने रूकमणि कृष्ण विवाह के पूर्व कुलदेवी अंबा की पूजा, रूकमणि हरण और व्दारिका में विवाह की कथा सूक्ष्म तम वर्णन किया गया। इन दिनों नरवार की गलियों में श्री मद भागवत की कथा भागवताचार्य पं मानवेंद्र जी के माधुर्य रसभरी कोकिला वाणी भक्ति रस भरी संयुक्त रूप से गुंजायमान हो रहीं हैं।

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