मूल भूत सुविधायें देने से कन्नी काटता रेल प्रबंधन
उमरिया — बीते दिवस रेल महाप्रबंधक बिलासपुर जोन के आगमन के दौरान महा प्रबंधक के समक्ष संचालित ट्रेनों के ठहराव की आवाज़ हर एक जगह चारों तरफ से गूंजती रही हैं, लेकिन रेल महा प्रबंधक की तरफ से किसी भी रेलवे स्टेशन में किसी भी गाडियों के ठहराव देने के लिये आश्वस्त नहीं किया गया। हर एक के लिए रटा रटाया जुमला रेलवे बोर्ड के ऊपर डाल कर अपनी जिम्मेदारी से बच निकलने का बेहतर और आसान तरीका अपना कर नागरिकों और जनप्रतिनिधियों को उल्लू बना निकल गये । बिलासपुर जोन के रेल विभाग के सबसे महत्वपूर्ण कुर्सी मे आसीन महा प्रबंधक का यह रवैया न सिर्फ नागरिकों को ठगने तक सीमित रहा अपितु क्षेत्रीय नागरिकों की मूल भूत समस्याओं के प्रति रेल प्रशासन की उदासीनता को भी उजागर कर दिया है। दुर्भाग्य जनक कहा जाये की जिन सवारी गाडियों का स्टापेज जिन रेलवे स्टेशनों में मिली थी, उनमें से भी कई स्टेशनों में क ई सवारी गाडियों का ठहराव कोरोना काल के समय से बंद कर दी गई थी। देश कोरोना जैसी महामारी से तो निपट लिया, लेकिन उसके कारण बंद हुई सवारी गाडियों के ठहराव को चालू कराने में आज भी असमर्थ साबित हो रहें हैं।जिसके पीछे रेलवे के महत्वपूर्ण ओहदो पर बैठे जिम्मेदार अधिकारी जितने दोषी है, उतने ही दोषी हमारे क्षेत्र के सांसद और विधायकों को भी दोषी माना जाता है। नही तो लोकतंत्र में जनता के सेवक माने जाने वाले यह कतिपय अधिकारी जनता और जनप्रतिनिधियों को ऊल्लू बना रफू चक्कर बना, नहीं निकल जाते।
ध्यान देने योग्य है कि उमरिया जिला मुख्यालय के रेलवे स्टेशन जहाँ पर बांधवगढ़ राष्ट्रीय उद्यान होने के बाद भी लगभग दो दर्जन सवारी गाडियों का स्टापेज आज तक नहीं मिला, जिसके लिए समय समय पर निरंतर मांग उठती रहती है, फिर भी गाडियों का स्टापेज नहीं मिल पाना हमारे माननीय महानुभावों और रेलवे के वरिष्ठ अधिकारियों की कार्यशैली को उजागर कर रहा है। करकेली रेलवे स्टेशन में इन्दौर बिलासपुर, भोपाल बिलासपुर अप डाऊन में रूकती थी, लेकिन कोराना वायरस ने जनता के साथ इन दोनों ट्रेनों को निगल गया, जिसका उपचार आज तक नहीं हो पाया। करकेली क्षेत्र के नागरिकों को होने वाले असुविधाओं की ओर किसी ने ठोस पहल नहीं की है।
नौरोजाबाद रेलवे स्टेशन भी इसी समस्या से जुझ रहा है। ट्रेनों के ठहराव को लेकर पिछले दिनों एक वृहद आंदोलन कर सवारी गाडियों के ठहराव की मांग करते रहे , लेकिन नगाड खाने में तूती की आवाज सुनाई नहीं देती। आज भी भोपाल -बिलासपुर, रीवा -बिलासपुर जैसे रूकने वाली ट्रेनों का स्टापेज कोरोना के नाम पर बंद कर दिया गया है। बीते दिवस भी नरेंद्र मोदी विचार मंच के राष्ट्रीय महामंत्री लक्ष्मण तिवारी जी और विधायक शिव नारायण सिंह की उपस्थिति में ट्रेनों का स्टापेज की मांग की गई है। इसी तरह मुदरिया में ग्राम पंचायत मुदरिया की सरपंच माया सिंह, मलहदू की सरपंच पूजा सिंह परस्ते, और बरहाई ग्राम पंचायत की सरपंच बब्बी बाई आदि ने मुदरिया रेलवे स्टेशन में सवारी गाडियों के स्टापेज का ज्ञापन सौपते हुए मांग की है। इसी तरह चंदिया, घुनघुटी, बंधवा वारा आदि रेलवे स्टेशनों में सवारी गाडियों के ठहराव की मांग लंबित है। बीरसिहपुर पाली में बरौनी गोंदिया एक्स्प्रेस की वर्षो पुरानी मांग भी लंबित है
इस प्रकार देखा जाये की चारों तरफ से एक ही मांग की जाती है फिर भी रेलवे प्रबंधन इन मांगों के लिए कदापि गंभीर नहीं है। रेल प्रबंधन को अधोसंरचना, माल ढुलाई और कमायी के साथ नागरिक जन भावनाओं का ध्यान दें तो रेलवे का यह स्वणिम काल साबित होगा
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