मेला कार्यालय का घेराव, होली तक मोहलत देने की मांग
वीरेंद्र चौहान, समाज जागरण ब्यूरो, किशनगंज।
ऐतिहासिक खगड़ा मेला को अचानक बंद करने के प्रशासनिक निर्देश से सैकड़ों छोटे दुकानदारों के सामने रोजी-रोटी का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। वर्षों से इस मेले पर निर्भर रहने वाले दुकानदारों ने सोमवार को मेला कार्यालय का घेराव कर अपनी पीड़ा जाहिर की और होली तक दुकानें संचालित करने की अनुमति देने की मांग की।
दुकानदारों का कहना है कि उन्होंने परंपरा के अनुसार होली तक दुकान चलने की उम्मीद में माल की खरीदारी की थी। दुकान लगाने में ही 15–20 दिन का समय लग जाता है, जिसके बाद ही कारोबार पटरी पर आता है। ऐसे में अचानक दुकान हटाने के निर्देश से लाखों रुपये का सामान फंसा हुआ है।
एक दुकानदार ने बताया, “हम लोग हर साल जनवरी से यहां दुकान लगाते हैं। निर्धारित समय से पहले दुकान पूरी तरह चल नहीं पाती, फिर भी होली तक यहां रहकर ही आमदनी होती है। इसी से परिवार का खर्च चलता है। अचानक हटाने का आदेश मिला तो समझ नहीं आ रहा कि माल का क्या करें और घर कैसे चलाएं।”
गौरतलब है कि 12 जनवरी को शुरू हुआ यह मेला सामान्यतः एक महीने तक चलता है, जबकि छोटे व्यापारी—जैसे खिलौने, मीना बाजार और घरेलू सामान बेचने वाले—होली तक डटे रहते हैं। इस वर्ष झूले, मौत का कुआं और सर्कस जैसी बड़ी दुकानें निर्धारित अवधि में बंद हो चुकी हैं, लेकिन छोटे दुकानदार अब भी ग्राहकों के भरोसे मेला परिसर में मौजूद हैं।
राजकीय दर्जा प्राप्त इस मेले से सैकड़ों परिवारों की आजीविका जुड़ी है। दुकानदारों का कहना है कि यदि प्रशासन कुछ दिनों की मोहलत दे दे, तो वे सम्मानपूर्वक अपना कारोबार समेट सकेंगे और भारी आर्थिक नुकसान से बच सकेंगे।
मामले में मेला संवेदक बबलू साहा ने स्वीकार किया कि प्रशासन से दुकानें हटाने का आदेश मिला है। उन्होंने कहा कि दुकानदारों की मांग को देखते हुए प्रशासन से पुनर्विचार का आग्रह किया गया है, ताकि छोटे व्यापारियों की आजीविका पर आंच न आए।
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