परमहंस आश्रम शक्तेशगढ़ में महात्माओं के आने का सिलसिला हुआ शुरू
20 से 25 लाख भक्तों के आगमन की उम्मीद
ब्यूरो चीफ़/ समाज जागरण
सोनभद्र। गुरुवार गुरु पूर्णिमा गुरु दर्शन की प्यास, अड़गड़ पथ अच्युत चला श्री राम नाम की आस” उक्त बातें मीडिया के समक्ष संत अच्युतानंद जी महाराज ने बताया कि विश्व के कोने-कोने से इस गुरु पूर्णिमा को परमहंस आश्रम शक्तेशगढ़ में संत महात्माओं के आने का सिलसिला शुरू हो चुका है यह गुरु पूर्णिमा महोत्सव आगामी 10 जुलाई को दिन गुरुवार पावन पर्व मनाया जाएगा विश्व महापुरुष के रूप में यथार्थ गीता के प्रणेता योगेश्वर महाप्रभु स्वामी अड़गड़ानंद जी महाराज का दिव्य दर्शन सत्संग एवं विशालकाय भंडारे का आयोजन किया जा रहा है ऐसे में यह पावन पर्व और भी खास होने वाला है
संत अच्युतानंद जी महाराज में कहा कि महापुरुष वाह्य तथा आंतरिक, व्यवहारिक तथा आध्यात्मिक लोक कीर्ति और यथार्थ वेद रीति दोनों की जानकारी रखता है यही कारण है कि समस्त समाज को महापुरुषों ने रहन-सहन का विधान बताया और एक मर्यादित व्यवस्था दी। वशिष्ठ, विश्वामित्र, स्वयं योगेश्वर श्री कृष्ण, महावीर स्वामी, महात्मा बुद्ध, मूसा, ईसा, मुहम्मद साहब, रामदास, दयानंद, गुरु गोविंद सिंह ,इत्यादि सहस्त्रों महापुरुषों ने ऐसा किया; किंतु व्यवस्थाएं सामयिक होती हैं। पीड़ित समाज को भौतिक वस्तु प्रदान करना यथार्थ नहीं है। भौतिक उलझने क्षणिक है शाश्वत नहीं, इसलिए उनका हल भी तत्सामयिक एक होता है।
गीतोक्त ज्ञान ही विशुद्ध मनुस्मृति है योगेश्वर श्री कृष्ण ने कहा कि कल्याण -पथ की जानकारी, उसका साधन और उसकी प्राप्ति सद्गुरु से होती है इधर-उधर तीर्थों में बहुत भटकने या बहुत परिश्रम से यह तब तक नहीं मिलता, जब तक किसी संत द्वारा न प्राप्त किया जाए। यथार्थ गीता अध्याय 4 श्लोक 34 में श्री कृष्ण ने कहा- अर्जुन तू किसी तत्वदर्शी महापुरुष के पास जाकर भली प्रकार दंड -प्रणाम कर, निष्कपट भाव से सेवा करके, प्रश्न करके प्रश्न करके उस ज्ञान को प्राप्त कर। प्राप्ति का एकमात्र उपाय है, किसी महापुरुष का सानिध्य और उनकी सेवा। उनके अनुसार चलकर योग की संसिध्दिकाल में पाएगा।
अंत में योगेश्वर महापुरुष कहते हैं अर्जुन! सारे धर्मों की चिंता छोड़कर एक मेरी शरण में हो जा। अतः एक परमात्मा के प्रति समर्पित व्यक्ति ही धार्मिक है। एक परमात्मा में श्रद्धा स्थिर करना ही धर्म है ।उस एक परमात्मा की प्राप्ति की निश्चित क्रिया को करना धर्म है। इस स्थिति को प्राप्त महापुरुष, आत्मतृप्त महापुरुषों का सिद्धांत ही सृष्टि में एकमात्र धर्म है। उनकी शरण में जाना चाहिए कि उन महापुरूषों ने कैसे उस परमात्मा को पाया? किस मार्ग से चलें ?वह मार्ग सदा एक ही है, उस मार्ग से चलना धर्म है। स्वामी अच्युतानंद जी महाराज ने कहा कि मानव धर्मशास्त्र यथार्थ गीता प्रत्येक लोगों के घर में होना चाहिए इतना ही नहीं प्रतिदिन नियम संयम से एक अथवा दो श्लोक का अवश्य अध्ययन करना चाहिए यह गुरु पूर्णिमा देश और विदेश से संत महात्माओं समेत सभी भक्तगण अपने आराध्य महापुरुष सदगुरुदेव भगवान के दर्शन हेतु लालायित सिर्फ और सिर्फ गुरु दर्शन से ही भक्ति रूपी प्यास बुझ जाती है परमहंस आश्रम शक्तेशगढ़ की अद्भुत महिमा पूरे विश्व मंडल पर सुशोभित हो रही है रात्रि में ऐसा प्रतीत होता है मानो स्वर्ग जमीन पर उतर गया हो अभी से इस आश्रम में भक्तों के आने का सिलसिला शुरू हो चुका है आश्रम के सूत्रों के अनुसार लगभग 20 से 25 लाख के बीच भक्तों के आने की उम्मीद बताई जा रही है इस अवसर पर जगह-जगह यथार्थ गीता निःशुल्क उपलब्ध कराया जाएगा परमहंस आश्रम कैलाशपुरी परसौना घोरावल से संत श्री राम महाराज उर्फ मड़ई महाराज जी एवं आश्रम के वरिष्ठ संत नारद जी महाराज, लाले महाराज, आशीष महाराज, दीपक महाराज, चंद्र चमकानंद जी महाराज, गुजरात से स्वामी निर्मल महाराज, राजेश्वरानंद जी महाराज, पटना बिहार से श्रद्धा बाबा, सहित सैकड़ो महात्मा एवं लाखों भक्त योगेश्वर महाप्रभु का दर्शन पूजन करेंगे।
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