कुत्ता काटने के मामलों में तय प्रोटोकॉल के तहत इलाज, जिले में एआरवी की पर्याप्त उपलब्धता

वीरेंद्र चौहान, समाज जागरण ब्यूरो किशनगंज।
12 जनवरी।
कुत्ता काटने की घटनाएँ केवल सामान्य चोट नहीं, बल्कि एक जानलेवा और लगभग असाध्य बीमारी रेबीज का गंभीर खतरा होती हैं। चिकित्सकीय विशेषज्ञों के अनुसार रेबीज के लक्षण प्रकट हो जाने के बाद मरीज के बचने की संभावना न के बराबर रह जाती है। ऐसे में कुत्ता काटने के तुरंत बाद घाव की सफाई, प्राथमिक उपचार और समय पर एंटी रेबीज वैक्सीन (एआरवी) लगवाना जीवनरक्षक साबित होता है।


हाल ही में बहादुरगंज सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र से जुड़े एक मामले को लेकर उठे सवालों के बीच स्वास्थ्य विभाग ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा है कि उपचार पूरी तरह तय चिकित्सकीय प्रोटोकॉल के अनुसार किया गया।
रविवार को प्राथमिक उपचार, ओपीडी में एआरवी देना तय प्रक्रिया
बहादुरगंज सीएचसी की प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. रिजवाना तबस्सुम ने बताया कि 11 जनवरी (रविवार) को कुत्ता काटने से घायल युवक को तत्काल प्राथमिक उपचार दिया गया। चूँकि रविवार को ओपीडी सेवा बंद रहती है, इसलिए मरीज को टेटनस का इंजेक्शन, घाव की समुचित सफाई और मरहम लगाया गया तथा अगले कार्यदिवस में ओपीडी में आकर एंटी रेबीज वैक्सीन लेने की सलाह दी गई। उन्होंने स्पष्ट किया कि एआरवी ओपीडी के माध्यम से ही लगाया जाता है, जो स्थापित चिकित्सकीय नियम है।


जिले में एआरवी की कोई कमी नहीं
जिला कार्यक्रम प्रबंधक डॉ. मुनाजिम ने बताया कि किशनगंज जिले में एंटी रेबीज वैक्सीन की पर्याप्त उपलब्धता है। वर्तमान स्टॉक के अनुसार—
सदर अस्पताल, किशनगंज – 1200 वायल
छात्तरगाछ रेफरल अस्पताल – 240 वायल
सीएचसी बहादुरगंज – 400 वायल
सीएचसी ठाकुरगंज – 234 वायल
सीएचसी पोठिया – 320 वायल
सीएचसी कोचाधामन – 170 वायल
सीएचसी दिघलबैंक – 650 वायल
सीएचसी टेढ़ागाछ – 608 वायल
किशनगंज ग्रामीण पीएचसी – 280 वायल
उन्होंने बताया कि एआरवी स्टॉक की नियमित निगरानी की जाती है, ताकि किसी भी मरीज को टीकाकरण से वंचित न होना पड़े।


रेबीज: रोकथाम ही एकमात्र इलाज
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार रेबीज एक वायरल संक्रामक रोग है, जो संक्रमित कुत्ते, बिल्ली, बंदर या अन्य जानवरों के काटने, खरोंच या लार के संपर्क से फैलता है। प्रारंभिक लक्षण हल्के होते हैं, लेकिन बाद में पानी से डर, अत्यधिक उत्तेजना, झटके और लकवे जैसे गंभीर लक्षण उभरते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि लक्षण प्रकट होने के बाद इलाज संभव नहीं होता, इसलिए समय पर वैक्सीन और आवश्यक होने पर इम्युनोग्लोबुलिन लेना ही एकमात्र उपाय है।
कुत्ता काटने पर क्या करें
सिविल सर्जन ने बताया कि कुत्ता या अन्य जानवर काट ले तो—
घाव को तुरंत साबुन और साफ पानी से 10–15 मिनट तक धोएँ
एंटीसेप्टिक लगाएँ


नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र जाकर चिकित्सकीय सलाह लें
डॉक्टर द्वारा बताए गए अनुसार पूरा टीकाकरण कोर्स समय पर पूरा करें
जन-सहयोग से ही सुदृढ़ होगी स्वास्थ्य व्यवस्था
सिविल सर्जन ने कहा कि स्वास्थ्य सेवाएँ तभी प्रभावी होंगी, जब आमजन और स्वास्थ्य कर्मी मिलकर सहयोग करें। अफवाहों से बचें, चिकित्सकों की सलाह का पालन करें और समय पर ओपीडी में पहुँचकर इलाज कराएँ। रेबीज जैसी घातक बीमारी से बचाव के लिए जागरूकता, सहयोग और समय पर इलाज ही सबसे प्रभावी उपाय है।

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