अनिल कुमार अग्रहरि/ समाज जागरण
सोनभद्र। रिहन्द डेम में मछली मारने को लेकर एक गंभीर मामला सामने आया है। जानकारी के अनुसार माह जून 2025 में मछली मारने का पूर्व टेंडर समाप्त हो गया था, जिसके बाद 11 दिसंबर 2025 को नए ठेकेदार को टेंडर आवंटित किया गया। लेकिन हैरानी की बात यह है कि अब तक मत्स्य विभाग द्वारा ठेकेदार को मछली मारने की विधिवत स्वीकृति प्रदान नहीं की गई है। इसके बावजूद ठेकेदार द्वारा विभागीय मिलीभगत के सहारे रिहन्द डेम में धड़ल्ले से मछली मारने का कार्य जारी है। स्थानीय सूत्रों के अनुसार ठेकेदार अक्सर बिना किसी विभागीय अनुमति के ही जाल डालकर मछली शिकार कराता रहा है, जिससे शासन के नियमों और शर्तों की खुली अवहेलना हो रही है।
बताया जा रहा है कि टेंडर की शर्तों के अनुसार विभागीय स्वीकृति के बाद ही मछली मारने की अनुमति दी जानी चाहिए, लेकिन नियमों को ताक पर रखकर अवैध रूप से मछली शिकार किया जा रहा है। इससे न केवल राजस्व को नुकसान हो रहा है, बल्कि पारदर्शिता पर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
इस पूरे मामले में विभागीय अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध बताई जा रही है। जानकारों का कहना है कि यदि समय रहते जांच नहीं हुई तो यह मामला बड़े घोटाले का रूप ले सकता है। स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों ने उच्चस्तरीय विभागीय जांच कराकर दोषियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की मांग की है। अब देखना यह है कि शासन-प्रशासन इस गंभीर आरोप पर क्या संज्ञान लेता है और रिहन्द डेम में चल रहे कथित अवैध मछली शिकार पर कब तक रोक लगाई जाती है।
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