समाज जागरण/ आदिवासी सुनील त्रिपाठी
ओबरा/ सोनभद्र। स्थानीय तहसील परिसर में अधिवक्ताओं ने तहसील प्रशासन के खिलाफ किया जोरदार प्रदर्शन। उन्होंने प्रशासनिक अधिकारियों पर सरकारी कार्यों में लापरवाही और भ्रष्टाचार का आरोप लगाया। अधिवक्ता संघर्ष समिति तहसील ओबरा के बैनर तले दर्जनों अधिवक्ताओं ने नारेबाजी करते हुए विरोध जताया। अधिवक्ता संघर्ष समिति इस दौरान गंभीर आरोप लगाए। तहसील ओबरा में इन दिनों भ्रष्टाचार चरम पर है। कई फाइलें लंबित पड़ी हैं अधिवक्ता संघर्ष समिति ने दस मांगो को लेकर उपजिलाधिकारी ओबरा के नाम से स्टोनो को ज्ञापन सौंपा। न्यायालय में दाखिल खारिज की प्रक्रिया को सहज एवं सरल बनाया जाए ताकि अधिवक्तागण व वादकारीगण को सुलभ व सरल न्याय प्राप्त हो सके।
आर के कार्यालय में परवाना को आर 6 रजिस्टर व कंप्यूटरकृत करने का समय क्रमवार निर्धारित किया जावे ताकि आर के कार्यालय में व्यापक भ्रष्टाचार पर प्रभावी अंकुश लग सके। अधिवक्तागण व वादकारियों के लिए शुद्ध पेयजल की व्यवस्था तत्काल किया जाए। उप निबंधन कार्यालय ओबरा व आपूर्ति कार्यालय ओबरा को तत्काल तहसील परिसर ओबरा में स्थापित किया जावे ताकि उप निबंधन कार्यालय में व्यापक भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाया जा सके।
तहसील परिषद ओबरा में निर्मित कैंटीन वह फोटो स्टेट की दुकानों का टेंडर प्रक्रिया पूर्ण कर तत्काल संचालित कराया जाए ताकि अधिवक्तागण व वादकारियों को होने वाली असुविधा का निदान हो सके अधिवक्ताओं ने आदि मांगो को लेकर ज्ञापन दिया। अधिवक्ताओं ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर जल्द सुनवाई नहीं हुई, तो आगामी सात दिनों बाद अनिश्चितकालीन धरना प्रदर्शन किया जाएगा। इस दौरान उमेश चन्द शुक्ल, संजीत चौबे, अनिल मिश्रा, कपूर चंद पांडेय, संजय दुबे, सुशील कुमार शर्मा, विमलेश, मनीष मिश्रा, कर्मवीर, अमित उपाध्याय व अधिवक्तागण उपस्थित रहे।



