- गायत्री भवन तेजनगर, उरमौरा में चल रहे श्रीमद्भागवत कथा सुनने को जुटे श्रद्धालु
समाज जागरण ब्यूरो
सोनभद्र। गायत्री भवन तेजनगर उरमौरा, राबर्ट्सगंज में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिन वृहस्पतिवार को अयोध्या धाम से पधारे मनीष शरण जी महराज ने कथा सुनाते हुए कहा जब धर्म की हानि होती है तो भी भगवान् आते हैं और जब धर्म की ग्लानि होती है तब भी भगवान आते हैं। हानि और ग्लानि का अंतर बताते हुए कहा कि जैसे कोई अपने बच्चे को कुछ पैसे देकर बाजार भेजे और वह उस पैसे को कंही खो कर आ जाये तो इसी को हानि कहेंगे, लेकिन वहीं बच्चा उसी पैसे से शराब पीकर आये तो माता पिता को ग्लानि होगी।
आगे बताते हुए कहा भगवान दोनों ही स्थिति में अवतार धारण करते हैं, जब जब होहिं धरम कै हानी, बाढ़इ असुर अधम अभिमानी। तब तब धरि प्रभु विविध शरीरा, हरही कृपा निधि सज्जन पीरा।। और आगे बताया “यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवती भारत, अभ्युथानमधर्मस्य तदात्मानम सृजाम्यहं। जब जब धर्म की ग्लानि होती है तो भगवान का अवतार होता है। जन्म के अन्य और कारण बताते हुए कहा” विप्र धेनु सुर संत हित लीन्ह मनुज अवतार, उपरोक्त ब्राह्मण, गाय, देवता और संतो के मंगल के लिए ही भगवान अवतार लेकर धर्म की रक्षा करते हैं।
मुख्य यजमान वरिष्ठ अधिवक्ता पवन मिश्र पत्नी सहित सपरिवार कथा श्रवण किए। इस अवसर पर भागवत कथा में अम्बरीष जी राष्ट्रीय संगठन मंत्री विश्व हिंदू परिषद , नीरज सिंह , विनोद चौबे, पद्माकर द्विवेदी, करुणाकर द्विवेदी, दिनानाथ पांडे सहित भक्तगण, महिलाएं, बच्चे मौजूद रहे।
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