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काॅलबेल बजी और नित्य की तरह बैठकी जम गयी!
कल दिल्ली से हमर भतिजवा आइल है! इहाँ बिहार की राजनीति पर बात करत रहे तो हम पुछ दिये कि दिल्ली में केकरा वोट दिया था! तो बोला कि उहाँ का हम वोटरे नहीं हैं तो कईसे वोट देते! तब त चुनाव में बहुते आदमी, जो बाहर गईल ह, वोटे नहीं देता है! — मुखियाजी ने महत्वपूर्ण मुद्दा रखा!
मुखियाजी, 2019 के लोकसभा चुनाव के आंकड़े के अनुसार,देश में लगभग 91 करोड़ मतदाता हैं लेकिन 30% के करीब वोट दे हीं नहीं पाते! ये वैसे लोग होते हैं जिनका अपने गाँव, घर के वोटर लिस्ट में नाम रजिस्टर्ड है लेकिन किसी कारण वश प्रवासी हो गये हैं और वहाँ वोटर के रूप में रजिस्ट्रेशन नहीं करवाये हैं! जैसे घर से दूर रहने वाले नौकरी पेशा, शहरों में जाकर पढ़ने वाले छात्र, शादी के बाद ससुराल गयी युवतियाँ आदि! — मास्टर साहब बात को पकड़े!
लिजिये, इसी बात का संज्ञान सुप्रीम कोर्ट 2015 को लिया था और चुनाव आयोग को निर्देश दिया था कि कोई ऐसी व्यवस्था देखे जिससे दूर दराज रहने वाले वोटर भी अपने वोट के अधिकार का उपयोग कर सके! और इसी को ध्यान में रखकर चुनाव आयोग ने आईआईटी मद्रास और कानपुर और कुछ अन्य एक्सपर्ट से जुड़कर रिमोट वोटिंग मशीन पर काम शुरू किया! इससे वोटर दूर रहकर भी टू- वे इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग सिस्टम का प्रयोग करके बायोमेट्रिक डिवाइस और वेब कैमरे की सहायता से वोट डाल पायेगा!इसके लिये चुनाव आयोग हर शहर में रिमोट वोटिंग स्पाट बनायेगा जहाँ रजिस्टर्ड वोटर को वोट देने जाना होगा! — कुंवरजी आगे की बताये!
इस बीच बेटी चाय का ट्रे टेबल पर रख गयी और हम सभी बहस के साथ साथ चाय की चुस्कियां भी लेते रहे!
तो एकरा लिये वोटर को का करना होगा कि उहाँ उ अपने क्षेत्र में , अपना मन के उम्मीदवार को वोटवा दे पावे! — मुखियाजी उत्सुक लगे!
मुखियाजी, इसके लिये वोटर को आनलाइन या आफलाइन आवेदन करना होगा! फिर चुनाव आयोग मतदाताओं द्वारा दी गई जानकारी को उसके गृह निर्वाचन क्षेत्र में वेरिफाई करवायेगी! और वोटर को स्कैन करने वाला आईडी कार्ड मिलेगा जिसपर बारकोड होगा! ऐसे वोटरों के लिये मतदान के समय रिमोट वोटिंग सेंटर स्थापित किये जायेंगे! —कुंवरजी आगे की समझाये!
अरे वाह! तब त देश में वोटिंग के दरो बढ़ जायेगा! — मुखियाजी उत्सुक लगे!
एक बात और एक आरवीएम से 72 निर्वाचन क्षेत्र को कवर किया जा सकेगा ! — कुंवरजी रुके!
लेकिन ए कुंवरजी, अभी ये वोटिंग सिस्टम लागू करना आसान नहीं होगा! कई तरह की प्रक्रियाओं से गुजरना होगा! वैसे चुनाव आयोग इसके लिये 16 जनवरी को डेमो रखा है! चुनाव आयोग को विभिन्न राजनीतिक दलों से सहमति लेनी पड़ेगी! उन्हें इसके फायदे के बारे में समझाना होगा! — मास्टर साहब ने सही कहा!
लिजिये, हमारे यहाँ जब ईबीएम से चुनाव होता है तो उस पर लोग प्रश्न चिन्ह पैदा करते हैं तो इस नवीन टेक्नोलॉजी- आरवीएम पर तो बवाल हीं मचायेंगे! — सुरेन्द्र भाई हाथ चमकाये!
ए सरजी, मोदी विरोधी पार्टियां तो निश्चित तौर पर कहेंगी कि जब बड़े – बड़े विभागों की बेवसाइट को हैक कर लिया जाता है तो इस आरवीएम को भी हैक करके किसी खास उम्मीदवार के पक्ष में सारे वोट किये जा सकते हैं! — पारस नेता ने सही बात कही!
नेताजी, एक बात स्पष्ट कर दूं कि इस रिमोट वोटिंग मशीन में वोटिंग के लिए इंटरनेट का इस्तेमाल नहीं किया जायेगा अत: हैकिंग की संभावना न के बराबर है!— कुंवरजी स्पष्ट किये!
अजी, मुझे जहाँ तक मालुम है आरवीएम लागू करने के पहले चुनाव आयोग को कई तरह की कानूनी प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ेगा! जैसे जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1950,51 चुनाव संहिता नियम 1961, फिर निर्वाचन पंजीकरण अधिनियम 1960 में भी संसोधन करना होगा!
खैर जो भी हो देश के सभी मतदाता चुनाव में भाग ले सकें इसकी व्यवस्था की जिम्मेदारी भी तो चुनाव आयोग पर हीं है और यदि नवीन टेक्नोलॉजी से चुनाव आयोग, एक बड़े तबके को चुनाव प्रक्रिया में भाग लेने में सक्षम बनाती है तो हमें इसका स्वागत करना चाहिए! — मैं भी बहस में अपने को सरीक किया!

ए सरजी, देखते नहीं हैं! चाहे चुनाव राज्य स्तर का हो चाहे केंद्र स्तर का जब विपक्षी पार्टियां चुनाव हार जातीं हैं तो तुरंत हारने का ठिकरा ईवीएम पर फोड़ देती हैं लेकिन जब जीत जातीं हैं तो चूं भी नहीं करतीं! अब ऐसी स्थिति में आरवीएम को लागू करना इतना आसान नहीं होगा !! — सुरेन्द्र भाई गंभीर लगे!
इसीलिये तो चुनाव आयोग ने सभी केंद्रीय एवं क्षेत्रीय राजनीतिक दलों से 31 जनवरी तक लिखित राय मांगी है!
विगत में हमलोगों ने देखा है कि क्षेत्रीय दलों एवं कुछ राष्ट्रीय दलों द्वारा ईवीएम की जगह वैलेट से वोटिंग की मांग की गयी थी क्योंकि उनका मानना था कि ईवीएम से चुनाव में घपला किया जा सकता है लेकिन जब चुनाव आयोग ने चैलेंज किया कि आवो और घपला करके दिखाओ तो गदहों की बोलती बंद हो गयी! — कहके पारस नेता हंस दिये!
कुछो हो, अतना त हमको बुझाता है कि इ नवका सिस्टम जिससे बाहरो रहे वाला अपन कन्चुयेंसी में, बगैर आये वोट दे सकेगा तब तो वोटरो का संख्या बढ़ेगा अवर सही सही चुनावो होगा! आच्छा अब हम चलता है!— कहकर मुखियाजी उठ गये और इसके साथ हीं बैठकी भी…..!!!
प्रोफेसर राजेन्द्र पाठक (समाजशास्त्री)
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