दैनिक समाज जागरण अनील कुमार संवाददाता नबीनगर (औरंगाबाद)
नबीनगर (बिहार) 26 सितंबर 2024 नवीनगर में बुधवार को जिउतिया का पर्व श्रद्धा एवं भक्ति के साथ मनाया गया। शहर के श्री महाबीर मंदिर के प्रांगण में महिलाओं ने पूजा-अर्चना कर ईश्वर से संतान की लंबी उम्र तथा हर दुख व बाधा से बचाने की कामना की। जिउतिया पर्व को ले महिलाओं ने दिनभर उपवास रखा। पूजा के बाद जितिया का धागा बांधकर पुत्र-पुत्रियों की लंबी उम्र की कामना की। यह व्रत अश्विन महीना के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि के दिन मनाया जाता है। पुत्रवती माताओं ने निर्जला उपवास रहकर रात को जिउतिया व्रत की कथा मे वर्णित चील और सियार की प्रतिमा बनाकर मंदिरों मे स्थापन कर पूजा अर्चना किया। बड़ी संख्या में महिलाओं ने सामूहिक रूप से जितिया की पूजा की। पंडित अरुण वैध ने कहा कि संतान की लंबी आयु के लिए माताएं ये व्रत करती हैं। वे विभिन्न अनुष्ठानों का पालन करते हुए भोजन और पानी के बिना उपवास करती हैं। जीवित्पुत्रिका व्रत जिसे आमतौर पर जिउतिया व्रत के रूप में जाना जाता है। उन्होंने बताया कि भगवान श्री कृष्ण की कृपा से उत्तरा के बच्चों को कुछ नहीं हुआ। इस घटना के बाद उत्तरा के पुत्र का नाम जीवित्पुत्रिका नाम दिया गया। यही पुत्र आगे चलकर परीक्षित बने। ऐसे में तभी से संतान की लंबी आयु की उम्र के लिए जिउतिया व्रत रखा जाता है।यह एक निर्जला व्रत है जो संतान के दीर्घायु होने और अनिष्टों के नाश के लिए केवल माताएं ही करती है। इस दिन जीवित्पुत्रिका की पूजा करने से साधक को मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है और संतान को भी लंबी आयु का वरदान प्राप्त होता है।हिंदू पंचाग के अनुसार यह अश्विन मास में कृष्णपक्ष की अष्टमी तिथि को किया जाता है। इसे जिउतिया, जीतिया या जीमुतवाहन व्रत भी कहते हैं। यह व्रत तीन दिनों तक किया जाता है। तीनों दिन व्रत की विधि अलग-अलग होती है।पहला दिन नहाई खाई : यह दिन जीवित्पुत्रिका व्रत का पहला दिन कहलाता है। इस दिन से व्रत शुरू होता है। इस दिन महिलाएं नहाने के बाद एक बार भोजन लेती है। फिर दिनभर कुछ नहीं खाती। बताया गया कि खुर जितिया यह जीवित्पुत्रिका व्रत का दूसरा दिन होता है इस दिन महिलाएं निर्जला व्रत करती हैँ यह दिन विशेष होता है। तीसरे दिन पूजा में चढ़ाए गए प्रसाद चना को गटक कर या पानी के साथ निगल कर व्रत को तोड़ा जाएगा। जितने पुत्र एवं पुत्रियां रहते है उतने ही चना गटककर अपना उपवास तोड़ती है। इसके बाद पकवान बनाकर पित्तरों को चढ़ाने के बाद ही महिलाएं भोजन ग्रहण करती है। ग्रामीण क्षेत्रों में भी पर्व की धूम रही। पर्व को ले सुबह से ही बाजार में चहल पहल देखी गई। बाजार में भीड़ भाड़ की स्थिति रही। लोग पूजा में आने वाले आवश्यक सामग्री की खरीददारी में लगे रहे। फल, किराना, सब्जी आदि की दुकानों पर भीड़ भाड़ की स्थिति रही। पर्व के कारण फल एवं सब्जी की मांग बढ़ने के कारण फल व सब्जी के दाम में इजाफा देखा गया।
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