गर्दन पर लटका है एससी एसटी एक्ट एवं महिला उत्पीड़न की तलवार !! कराह रहे है जनता, बुद्धिजीवी और पत्रकार !!!
लूट की राशि से मालामाल होते जा रहे हैं थानेदार, पंचायती राज्य ब्यवस्था के अधिकारी एवं पंयायत सरकार!!!! वाह रे बिहार!!!!!
दैनिक समाज जागरण, अनिल कुमार मिश्र ,ब्यूरो चीफ बिहार -झारखंड प्रदेश।
पंचायती राज व्यवस्था की एक झलक , आज के अंक में बेहद चौंकाने वाला है! पुलिस -अपराधी- बिचौलिया -गठ जोड़ के तहत थानेदार, त्रिस्तरीय पंचायत प्रतिनिधि एवं उनके चहेते विभिन्न गाॅव के दवंगों द्वारा पंचायत मद के शत- प्रतिशत योजनाओं की राशि सरेआम लूटा जा रहा। और अनैतिक कार्यो के विरुद्ध उठ रहे आवाज को दबाने के लिए दमन की कार्रवाई पुलिस करते आ रही है । फल स्वरूप पीड़ित विवश लोग अपराधजगत का सहारा लेने और और हथियार उठाने के लिए मजबूर एवं विवश दिखाई दे रहे हैं।अम्बा थाना में पदस्थापित थानेदार एवं उनके अनैतिक कार्य के संरक्षक पुलिस पदाधिकारी को उग्रवाद उत्पादक यंत्र कहा जाए ! तो इसमें किसी तरह की कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी।
अम्बा थाना में पदस्थापित थानेदार का इतिहास भी इस बात की गवाह है की लूट की राशि से मजबूत होते अपराधिक ढ़ाँचे के लिए थानेदार एवं इनके अनैतिक कार्यो के संरक्षक पुलिस पदाधिकारी जिम्मेवार हैं तथा पुलिस के कुकृत्यों को समाचार के माध्यम से रख पाना पत्रकारों के लिए लोहे के चना चना साबित हो रहा है।
पुलिस पदाधिकारी के दोहरी नीति एवं मापदंड के प्रतिफल में पुलिस बल पर लगातार हमले एवं पथराव होते आ रहे हैं और थाना की संरक्षण में सरकारी संपदा की लूट निर्वाधगति से जारी है । अगर यह कहा जाये कि पुलिस को हर हालत में पैसा चाहिए तो इसमें कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी। अगर आपके पास पैसा है तो पुलिस वाले बलात्कारी को साधु साबित कर देगे/ करा देगे और निर्दोष लोगों को अपराधी और बलात्कारी बना बना देगे।
यह सर्वेक्षण बिहार प्रदेश के औरंगाबाद जिले के अम्बा थाना के लिए है। शेष अगले अंक गतांक से आगे…..
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