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वाह रे बिहार ! पार्ट : -6,

जहां जाओगे ,हमें पाओगे। हम से बचकर कर अजी तू कहां जाओगे – थानेदार! कटुसत्य।।

गर्दन पर लटका है एससी एसटी एक्ट एवं महिला उत्पीड़न की तलवार !! कराह रहे है जनता, बुद्धिजीवी और पत्रकार !!!

लूट की राशि से मालामाल होते जा रहे हैं थानेदार, पंचायती राज्य ब्यवस्था के अधिकारी एवं पंयायत सरकार!!!! वाह रे बिहार!!!!!

दैनिक समाज जागरण, अनिल कुमार मिश्र ,ब्यूरोचीफ बिहार- -झारखंड प्रदेश /धनंजय कुमार विधि संवाददाता/ सत्य प्रकाश नारायण सहायक विधि संवाददाता बिहार- झारखंड तथा अन्य सहयोगी संवाददाता का संयुक्त रिपोर्ट।

बिहार प्रदेश में पंचायती राज व्यवस्था की एक झलक में थानेदारों का भूमिका लुटेरे वर्ग को संरक्षण प्रदान करता है। सरकारी राशि एवं सरकारी संपदा की लूट का पोषक थानेदार ” फिल्मी स्टाइल में” कहा करते हैं ,जहां जाओगे ,हमें पाओगे। हम से बचकर कर अजी तू कहां जाओगे ! पत्रकारों को नसिहत देते हुए कहा जाता है कि, आप चाहे जहां भी जाए ,जांच यहां ही आना है, और जब हम चाहेंगे तभी आपको न्याय मिलेगा ! नहीं चाहेंगे तो न्याय संभव नहीं है । ऐसी बातें, कोई एक दो अधिकारी द्वारा नहीं कही गई है ! ऐसी बातें करने वाले अधिकारियों का औरंगाबाद जिले में ताता लगा हुआ है।

वर्तमान हालातों से ऐसा प्रतीत होता है कि अनैतिक कार्य को अंजाम देने वाले लोग का औरंगाबाद बाद जिला के संबंधित थाने के अधिकारी गुलाम बन चुके हैं। ऐसा कोई एक दो उदाहरण नहीं है सैकड़ो उदाहरण है !

आखिर उद्देश्यों से भटक चुके हैं संबंधित थानेदार एवं सहायक दारोगा जी,अधिकारियों, कर्मचारियों एवं उनके चहते दबंग लोगों, अनैतिक रूप से नौकरी प्राप्त करने वाले , सरकारी योजनाओं को लूटने वाले ,सरकारी संपदा एवं वन संपदा को लूटने वाले , हरे वृक्षों की कटाई कर अवैध रूप से बेचने वाले के प्रति औरंगाबाद जिले के प्रशासनिक एवं पुलिस पदाधिकारी मेहरबान क्यों है? यह लोगों की समझ से परे हो चुका है!

आखिर जिला प्रशासन के साथ ऐसी कौन सी मजबूरियां है?

…. जो क्षेत्र में आतंक का पर्याय बन चुके थानेदार, संबंधित अधिकारी व कर्मचारी, क्षेत्रीय विचौलीय एवं अनैतिक रूप से नौकरी प्राप्त कर चुके लोगों के विरुद्ध कार्रवाई करने के जगह तमाशबीन हैं और सभी साक्ष्यों के बाबजूद भी जाॅच के नाम पर उद्देश्यों से भटक चुके लोगों एवं अनैतिक रूप से नौकरी प्राप्त कर चुके लोगों के बचाव में तमाम अधिकारी लगे हुए है। यह सर्वेक्षण रिपोर्ट दैनिक समाज जागरण टीम का सच्ची घटना से अधारित हैं ,शेष अगले अंक, गतांक से आगे…..


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