बहल की रामलीला से दो दशक से अधिक समय से जुड़े हैं योगी, सामाजिक सेवा में भी बनाई अलग पहचान
बहल, 20 अक्टूबर। बहल की रामलीला में हनुमान की भूमिका निभा रहे योगेश शर्मा ‘योगी’ पिछले दो दशक से अधिक समय से धार्मिक और सांस्कृतिक परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं। वर्ष 2005 से लगातार हनुमान का किरदार निभा रहे योगी को अभिनय की कला अपने पिता स्वर्गीय पुरुषोत्तम शर्मा से विरासत में मिली है। उनके पिता भी बहल की रामलीला में करीब दस वर्षों तक हनुमान की भूमिका निभा चुके थे।

पिता के निधन के बाद योगेश शर्मा ने उसी मंच पर उनकी विरासत को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया। उनके लिए हनुमान का किरदार केवल अभिनय नहीं, बल्कि पिता की स्मृतियों, पारिवारिक संस्कारों और धार्मिक आस्था से जुड़ा भावनात्मक रिश्ता भी है। वर्षों से इस भूमिका को निभाते हुए उन्होंने रामलीला में अपनी अलग पहचान बनाई है।
हनुमान के किरदार के साथ उद्घोषक की जिम्मेदारी भी
हनुमान के चरित्र में वीरता, विनम्रता, निष्ठा और प्रभु श्रीराम के प्रति अटूट समर्पण जैसे भाव प्रमुख हैं। योगेश शर्मा अपने अभिनय के माध्यम से इन गुणों को मंच पर जीवंत करने का प्रयास करते हैं। रामलीला में हनुमान की भूमिका निभाने के साथ वे उद्घोषक की जिम्मेदारी भी संभालते हैं। विजयदशमी के बाद गोसेवा के उद्देश्य से आयोजित नाटक में वे सेठ जी का किरदार निभाकर भी अपनी कला का प्रदर्शन करते हैं।
रक्तदान शिविरों से लेकर जरूरतमंद बेटियों की मदद तक
योगेश शर्मा ‘योगी’ धार्मिक और सांस्कृतिक गतिविधियों के साथ सामाजिक सेवा में भी सक्रिय हैं। वे बहल से पंचायत समिति सदस्य होने के साथ बहल युवा शक्ति संगठन के अध्यक्ष भी हैं। उनके नेतृत्व में संगठन की ओर से अब तक 48 रक्तदान शिविर आयोजित किए जा चुके हैं। इसके अलावा 49 जरूरतमंद बेटियों के विवाह में सहयोग किया गया है।
कोरोना महामारी के दौरान भी संगठन ने जरूरतमंद लोगों की सहायता के लिए उल्लेखनीय प्रयास किए। इस दौरान लोगों को ऑक्सीजन सिलेंडर उपलब्ध कराने, अस्पतालों में बिस्तर दिलाने और मरीजों को अस्पताल पहुंचाने में सहयोग किया गया। सामाजिक सरोकारों से जुड़े इन कार्यों के माध्यम से संगठन ने जरूरतमंदों की मदद करने का प्रयास किया।
1977 में हुई थी रामलीला समिति की स्थापना
बहल की रामलीला की गौरवशाली परंपरा को आगे बढ़ाने में श्री रामलीला नाट्य कला केंद्र समिति ट्रस्ट की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। समिति की स्थापना स्वर्गीय श्री दीपचंद चौधरी ने वर्ष 1977 में की थी। लंबे समय से आयोजित हो रही रामलीला क्षेत्र की धार्मिक और सांस्कृतिक गतिविधियों का अहम हिस्सा बनी हुई है।
योगेश शर्मा ‘योगी’ का इस मंच से जुड़ाव पारिवारिक विरासत, कला के प्रति समर्पण और सामाजिक जिम्मेदारी का उदाहरण है। जिस भूमिका को उनके पिता ने निभाया, उसी भूमिका के माध्यम से वे आज उनकी यादों को जीवित रखे हुए हैं। मंच पर अभिनय से लेकर सामाजिक सेवा तक उनकी सक्रियता बहल की सांस्कृतिक परंपरा और जनसेवा के प्रति उनके जुड़ाव को दर्शाती है।
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