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गोरखपुर | 1 दिसंबर 2025: उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने ऐतिहासिक कदम उठाते हुए गीता प्रेस गोरखपुर के विस्तार प्रोजेक्ट को मंज़ूरी दे दी है। सरकार 10 एकड़ भूमि और ₹81 करोड़ की वित्तीय सहायता प्रदान करेगी, जिसके बाद यहां अत्याधुनिक तकनीक से सुसज्जित नई प्रिंटिंग यूनिट स्थापित की जाएगी।
गीता प्रेस बीते कई वर्षों से धर्मग्रंथों, संत साहित्य, रामचरितमानस, गीता और सनातन संस्कृति से जुड़े ग्रंथों के प्रकाशन का प्रमुख केंद्र रहा है। समय के साथ बढ़ती मांग और पुरानी व्यवस्था के छोटे होते स्पेस को देखते हुए इस फैसले को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

समर्थन में आवाज़ें
इस फैसले को लेकर सोशल मीडिया पर व्यापक प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है।
📌 “गीता प्रेस का विस्तार सिर्फ एक प्रोजेक्ट नहीं, बल्कि सनातन संस्कृति की जड़ों को और मजबूत करने का संकल्प है।”
— जीतेन्द्र कुमार पेसवानी
📌 “मंदिरों को सरकारी नियंत्रण से मुक्ति चाहिए, गुरुकुल स्थापित होने चाहिए और मंदिरों का धन हिंदू समाज पर ख़र्च होना चाहिए।”
— D Kishore
समर्थकों का कहना है कि यह कदम सनातन संस्कृति के संरक्षण और उसके व्यापक प्रसार की दिशा में महत्वपूर्ण है।
विरोध और सवाल भी उठे
कुछ लोग इस फैसले पर सवाल भी खड़े कर रहे हैं।
📌 “गीता प्रेस का वार्षिक टर्नओवर लगभग ₹150 करोड़ है। वे खुद प्रबंधन कर सकते थे। ₹81 करोड़ सरकारी स्कूलों पर खर्च होते तो 81 स्कूलों का विकास हो सकता था।”
— अमित सिंगल
कुछ लोगों ने पर्यावरणीय तर्क भी दिए क्योंकि पुस्तकों के उत्पादन में बड़ी मात्रा में कागज की जरूरत होती है।
सांस्कृतिक निर्णय या राजनीतिक?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह फैसला लोकसभा चुनाव से पहले सांस्कृतिक और भावनात्मक जुड़ाव को मजबूत करने वाला कदम है। वहीं दूसरी ओर समर्थक इसे संस्कृति संरक्षण और परंपरा की अस्मिता का फैसला बताते हैं।
क्या बदलेगा इस विस्तार से?
✔ ज्यादा पुस्तकों की छपाई
✔ नई तकनीक आधारित प्रिंटिंग
✔ ई-पब्लिकेशन की संभावना
✔ स्वदेशी धार्मिक साहित्य की वैश्विक पहुंच
निष्कर्ष
गीता प्रेस विस्तार को लेकर देश में मत दो ध्रुवों में बंटे हैं—
एक ओर वे हैं जो इसे संस्कृति संरक्षण का युगांतकारी निर्णय मानते हैं,
तो दूसरी ओर वे जो इसे सार्वजनिक धन के उपयोग की प्राथमिकताओं पर सवाल के रूप में देखते हैं।
लेकिन इतना तय है कि यह फैसला आने वाले समय में धार्मिक प्रकाशन और सांस्कृतिक संवाद के क्षेत्र में महत्वपूर्ण असर छोड़ेगा।
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