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100 साल पहले भी गणपति उत्सव में ब्राह्मणों और गैर ब्राह्मणों की एकता को देख घबरा गए थे अंग्रेज : डॉ उमेश शर्मा

गणेशोत्सव पर्व विशेष –
आजादी के आन्दोलन में ब्राह्मणों और गैर ब्राह्मणों की रही है विशेष भूमिका : डॉ उमेश शर्मा

राष्ट्रीयता और हिन्दू एकता की भावना जगाता पवित्र गणेशोत्सव पर्व : डॉ उमेश शर्मा

सभी देशबासियों को पवित्र गणेश चतुर्थी की हार्दिक शुभकामनाएं :

आगरा। भारत पर्व-उत्सवों का देश है और गणेश चतुर्थी उन्हीं उत्सव में से एक है। गणेशोत्सव को 10 दिनों तक बड़े धूम-धाम से मनाया जाता है। इस त्योहार को गणेशोत्सव या विनायक चतुर्थी भी कहा जाता है। पूरे भारत में भगवान गणेश के जन्मदिन के इस उत्सव को उनके भक्त बहुत उत्साह के साथ मनाते हैं।

इस अवसर पर वरिष्ठ समाजसेवी डॉ उमेश शर्मा ने सभी देशबासियों को पवित्र गणेश चतुर्थी की हार्दिक शुभकामनाएं दी और उन्होंने कहा, गणेशोत्सव पर्व की आजादी के आन्दोलन में ब्राह्मणों और गैर ब्राह्मणों की विशेष भूमिका रही है। 100 साल पहले भी गणपति उत्सव में ब्राह्मणों और गैर ब्राह्मणों की एकता को देख अंग्रेज घबरा गए थे। पवित्र गणेशोत्सव पर्व राष्ट्रीयता और हिन्दू एकता की भावना जगाता हैं। गणपति उत्सव का मुख्य उद्देश्य हिन्दू एकता को हासिल करना है। इसके बिना गणेश उत्सव का कोई महत्व नहीं रहेगा। इस बात को तब पहली बार सभी हिन्दुओं ने महान स्वतंत्रता सेनानी लोकमान्य तिलक जी के इस उद्देश्य को बहुत गंभीरता से समझा। महान स्वतंत्रता सेनानी लोकमान्य तिलक जी का मानना था कि देश के असहाय कमजोर ग़रीब हिन्दुओं पर जब भी कोई बाहरी संकट आएगा तो हिन्दू ही हिन्दू को बचाएंगे।इसलिए सभी हिन्दूओं में एकता होना बहुत ज़रूरी हैं।
आजादी के आन्दोलन में लोकमान्य तिलकजी द्वारा गणेश उत्सव को लोकोत्सव बनाने के पीछे सामाजिक क्रान्ति का उद्देश्य था। लोकमान्य तिलक जी ने ब्राह्मणों और गैर ब्राह्मणों की दूरी समाप्त करने के लिए यह पर्व प्रारम्भ किया था जो आगे चलकर एकता की मिसाल बना। जिस उद्देश्य को लेकर लोकमान्य तिलक ने गणेश उत्सव को प्रारम्भ करवाया था वो उद्देश्य आज कितने सार्थक हो रहें हैं।

उन्होंने कहा, गणपति उत्सव में हर वर्ष हिन्दू एकत्रित होते हैं और राष्ट्रीयता को बढ़ाने का कार्य करते हैं। इस तरह लोगों का गणपति उत्सव के प्रति उत्साह बढ़ता गया और राष्ट्र के प्रति चेतना बढ़ती गई। इसके अलावा, यह उत्सव आज भी भारत के विभिन्न हिस्सों में सामूहिक रूप से मनाया जाता है, इस प्रकार, गणेश उत्सव की सार्वजनिक शुरूआत से भारतीय हिन्दू समाज में सांस्कृतिक जागरूकता और एकता आई, बल्कि यह देशभक्ति और सामाजिक एकता का प्रतीक भी बन गया। इसीलिए आज के समय में पूरे देश में पहले से कहीं अधिक धूमधाम के साथ गणेशोत्सव मनाए जाते हैं, मगर आज कुछ जगह गणेशोत्सव में दिखावा अधिक नजर आता है। आपसी सद्भाव व हिन्दू भाईचारे का अभाव दिखता है। आजकल गणेश उत्सव के पण्डाल एक दूसरे के प्रतिस्पर्धात्मक हो चले हैं। गणेशोत्सव में प्रेरणाएं कोसों दूर होती जा रही हैं और इनको मनाने वालों में हिन्दू एकता नाम मात्र की रह गई है। तो आइएं इस बार सभी ग़रीब अमीर हिन्दू एक बार फिर से संगठित होकर गणेशोत्सव को इतनी ख़ुशी उत्साह व धूमधाम से मनाएं, जिससे हिन्दू समाज में सभी ग़रीब अमीर हिन्दूओं में एकता और हिन्दू भाईचारा बढ़ सके। इसलिए, उन सभी विरोधियों से सावधान और सतर्क रहने की बहुत आवश्यकता है। क्योकि राष्ट्र से बढ़कर कुछ नहीं हो सकता, राष्ट्र तभी सशक्त हो सकता है, जब सभी ग़रीब अमीर हिन्दू एकजुट रहेंगे। देश और हिन्दू समाज को छुआछूत और जातिवाद के नाम पर बांटने वाली देश विरोधी ताकतों से सावधान रहकर इनका बहिष्कार रहना होगा। राष्ट्रहित और हिन्दुहित के लिय हम सभी हिन्दुओं को लोकमंगल व राष्ट्रमंगल के प्रति पूर्ण समर्पण भाव से कार्य करना होगा। तभी सही मायने में हमारी पूजा सार्थक हो सकेगी।


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