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श्रीभूमि जिले में आग की चपेट में आई 5 वर्षीय आदिवासी बच्ची गंभीर, सरकारी सहायता की गुहार

मुख्यमंत्री, स्वास्थ्य मंत्री व स्थानीय विधायक का ध्यान आकर्षित

श्रीभूमि संवाददाता, दैनिक समाज जागरण

श्रीभूमि जिले के रामकृष्णनगर विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत दुल्लभछड़ा के समीप स्थित रांखल गांव (भेटारबंद ग्राम पंचायत) के अत्यंत गरीब आदिवासी परिवार की 5 वर्षीय बच्ची अर्चना बर्मन 28 नवंबर की सुबह भयावह आग की दुर्घटना में गंभीर रूप से झुलस गई। प्राप्त जानकारी के अनुसार ठंड से बचने के लिए घर के बाहर जलाए गए अलाव के पास खेलने के दौरान अचानक आग फैल गई और बच्ची उसकी चपेट में आ गई।

परिजन तुरंत आग बुझाने में जुटे और गंभीर रूप से झुलसी अर्चना को दुल्लभछड़ा अस्पताल ले जाया गया। प्राथमिक उपचार के बाद डॉक्टरों ने उसे उन्नत इलाज के लिए सिलचर मेडिकल कॉलेज भेजने की सलाह दी। परिवार द्वारा सिलचर मेडिकल में भर्ती कराया गया, लेकिन परिजनों के अनुसार लंबे इलाज के बावजूद उचित उन्नत चिकित्सा सुविधा सही रूप में नहीं मिल पाई और बच्ची की हालत में सुधार नहीं हुआ।

इसके बाद मजबूरन परिजन उसे ग्रीन हिल्स अस्पताल ले गए, जहां लंप इंफेक्शन और ऑक्सीजन की समस्या के कारण पुनः स्थानांतरण करना पड़ा। संसाधनों के अभाव में बच्ची को अंततः जीवन ज्योति मेडिकल, एक निजी नर्सिंग होम, ले जाया गया। लेकिन आर्थिक तंगी के कारण परिवार एडमिशन कराने में असमर्थ था।

इसी बीच, सोशल मीडिया पर साझा वीडियो के माध्यम से मामला सामने आने पर पूर्व एनएफ रेलवे के चीफ इंजीनियर और सोनबिल निवासी प्रद्युत दास ने पहल की। उन्होंने वीडियो पोस्ट के आधार पर सोशल कार्यकर्ता आशिष चक्रवर्ती से संपर्क किया, सिलचर पहुंचकर बच्ची से मिले और अपने स्तर से 11 हजार रुपये की मदद प्रदान करते हुए निजी नर्सिंग होम में भर्ती की व्यवस्था कराई।

वर्तमान में बच्ची का इलाज जारी है, लेकिन परिजनों के अनुसार खर्च इतना अधिक है कि वह इसे आगे वहन करने में पूरी तरह असमर्थ हैं। सोशल वॉलंटियर आशिष चक्रवर्ती लगातार सोशल मीडिया के माध्यम से धन जुटाने का प्रयास कर रहे हैं, जिससे अब तक कुछ मदद मिल पाई है, परंतु चिकित्सा व्यय अत्यधिक होने के कारण यह पर्याप्त नहीं है।

स्थानीय लोगों ने सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा है कि जब सिलचर मेडिकल जैसा बड़ा सुपर स्पेशलिटी अस्पताल मौजूद है, तो गंभीर रूप से झुलसी बच्ची को निजी नर्सिंग होम में क्यों ले जाना पड़ रहा है? यदि सरकारी व्यवस्था में इलाज की गुणवत्ता बेहतर होती, तो गरीब परिवार निजी अस्पतालों पर निर्भर होने को मजबूर नहीं होते।

इस संबंध में बच्ची के पिता नीलमणि बर्मन तथा क्षेत्र के लोगों ने सरकार से तत्काल हस्तक्षेप कर अर्चना को बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने की मांग की है।
परिवार व स्थानीय समाज ने लोकप्रिय मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा, स्वास्थ्य मंत्री अशोक सिंगल तथा स्थानीय विधायक विजय मालाकार से विशेष आग्रह किया है कि बच्ची के उपचार हेतु उच्चस्तरीय सरकारी सहायता उपलब्ध कराई जाए, ताकि यह मासूम अपनी जिंदगी की लड़ाई जीत सके और स्वस्थ होकर घर लौट सके।

स्थानीय समाज तथा परिवार को अब सरकारी मदद की तत्काल प्रतीक्षा है।


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