डॉ. राघवेंद्र मिश्रा द्वारा लिखी परंपरागत जनमाध्यमों की उपयोगिता पर आधारित पुस्तक का हुआ लोकार्पण

कार्यक्रम में विद्वानों ने बताया—लोक संवाद हमारी संस्कृति की आधारशिला

अनूपपुर। परंपरागत जनमाध्यमों की प्रासंगिकता और उनकी उपयोगिता पर केंद्रित एक महत्वपूर्ण पुस्तक का लोकार्पण इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय में आयोजित कार्यक्रम में किया गया। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. अवधेश कुमार शुक्ल ने कहा कि परंपरागत जनमाध्यम भारत के इतिहास और प्राचीन संप्रेषण परंपरा को समझने का सबसे सशक्त माध्यम हैं। इन माध्यमों ने सदियों से सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक संवाद को जीवित रखा है।

यह पुस्तक पत्रकारिता एवं जनसंचार संकाय प्रमुख और विभागाध्यक्ष प्रो. राघवेंद्र मिश्रा द्वारा लिखी गई है, जिसका शीर्षक “परंपरागत जनमाध्यम— उत्पत्ति, उत्कर्ष एवं उपयोगिता” है। कुलपति ने कहा कि यह पुस्तक न केवल परंपरागत जनमाध्यमों के विभिन्न रूपों और उनके इतिहास पर प्रकाश डालती है, बल्कि वर्तमान समय में उनकी उपयोगिता और प्रासंगिकता को भी स्पष्ट करती है। यह विद्यार्थियों, शोधार्थियों और अध्येताओं के लिए समान रूप से उपयोगी सिद्ध होगी।


कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में प्राचीन इतिहास के विद्वान प्रो. आलोक श्रीवास्तव ने कहा कि लोक संवाद हमारी सभ्यता का मूल केंद्र रहा है। प्राचीन काल से ही हमारे पूर्वजों ने चित्रों, ध्वनियों, भाषा और प्रतीकों के माध्यम से एक सशक्त संप्रेषण प्रणाली विकसित की, जिससे हमारी संस्कृति समृद्ध हुई और पारंपरिक ज्ञान सुरक्षित रहा।

सामाजिक और सांस्कृतिक महत्व को उजागर करती पुस्तक

उन्होंने आगे कहा कि पुस्तक में लोककथा, लोकगाथा, लोकोक्ति, मुहावरे, मोटिफ, चित्रकारी जैसे विभिन्न पारंपरिक माध्यमों का व्यवस्थित वर्णन किया गया है, जो उनके सामाजिक और सांस्कृतिक महत्व को उजागर करता है। पुस्तक लगभग 400 पृष्ठों में परंपरागत जनमाध्यमों के हर पहलू को समेटने का प्रयास करती है और इसमें सांस्कृतिक संरक्षण एवं विकास में इन माध्यमों की भूमिका का भी विश्लेषण किया गया है।


लेखक प्रो. राघवेंद्र मिश्रा ने अपनी लेखन यात्रा साझा करते हुए बताया कि पुस्तक में भारत के साथ-साथ विश्व के विभिन्न महाद्वीपों और सभ्यताओं में प्रचलित जनमाध्यमों की जानकारी भी शामिल की गई है। पुस्तक सरल और रोचक भाषा में लिखी गई है, जिसमें चित्रों और तालिकाओं के माध्यम से विषय को समझने में सहूलियत मिलती है। कार्यक्रम में डॉ. संजय यादव ने पुस्तक की भाषा शैली और विषयवस्तु की सराहना करते हुए कहा कि यह पुस्तक पाठकों को व्यापक जानकारी देने के साथ-साथ विषय के सैद्धांतिक पहलुओं को भी स्पष्ट करती है। लोकार्पण समारोह पत्रकारिता एवं जनसंचार सभागार में आयोजित हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में शिक्षक, शोधार्थी और विद्यार्थियों ने भाग लिया। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन एवं मां सरस्वती के पूजनके साथ हुआ। अतिथियों का स्वागत प्रो. राघवेंद्र मिश्रा और प्रो. मनीषा शर्मा ने किया, जबकि संचालन शुभी विश्वकर्मा द्वारा किया गया।

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