समाज जागरण पटना जिला संवाददाता:- वेद प्रकाश
पटना/ बिहार के गया जिले में एक भीषण हादसा सामने आया है, जहां एक पुरानी दीवार गिरने से 10 वर्षीय बच्ची की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि उसकी दादी गंभीर रूप से घायल हो गईं। घायल महिला को इलाज के लिए मगध मेडिकल कॉलेज अस्पताल रेफर किया गया है, जहां उसकी हालत चिंताजनक बनी हुई है। इस घटना के बाद स्थानीय लोगों में दहशत का माहौल है और पुलिस मामले की छानबीन में जुट गई है। यह घटना गया शहर के विष्णुपद थाना क्षेत्र में स्थित चांद चौरा और नारायण चुआ इलाके की है। यहां एक अपार्टमेंट का निर्माण किया जा रहा था, जिसके लिए पहले से मौजूद एक पुरानी बाहरी दीवार को सहारा के तौर पर छोड़ दिया गया था। बुधवार को अचानक वह दीवार ढह गई और उसी वक्त रास्ते से गुजर रही महिला और उसकी पोती मलबे में दब गईं। हादसे में बच्ची की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि महिला को गंभीर चोटें आईं। स्थानीय लोगों ने तुरंत उन्हें मलबे से बाहर निकाला और अस्पताल पहुंचाया। पुलिस के अनुसार, मृतक बच्ची मानपुर की रहने वाली थी। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए मगध मेडिकल कॉलेज अस्पताल भेज दिया है। हादसे की जानकारी मिलते ही विष्णुपद थानाध्यक्ष धर्मेंद्र कुमार यादव अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचे और मामले की जांच शुरू कर दी। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, बालू के भारी स्टॉक के दबाव के कारण दीवार कमजोर हो गई थी, जिससे यह अचानक गिर गई। उन्होंने*निर्माण कार्य में लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा कि अगर सुरक्षा के उपाय किए गए होते, तो यह हादसा टाला जा सकता था। दीवार गिरने और लोगों के दबने की खबर फैलते ही आसपास के लोग घटनास्थल पर इकट्ठा हो गए। बच्ची की मौत से परिवार में कोहराम मच गया और स्थानीय लोगों में गुस्सा देखने को मिला। वे निर्माण कार्य में अनियमितताओं और सुरक्षा उपायों की कमी पर सवाल उठा रहे हैं। पुलिस ने हादसे की छानबीन शुरू कर दी है। प्रशासन यह जांच कर रहा है कि क्या निर्माण कार्य के दौरान सुरक्षा नियमों का पालन किया गया था या नहीं। इस घटना से एक बार फिर यह सवाल खड़ा हो गया है कि निर्माण कार्य के दौरान सुरक्षा उपायों को गंभीरता से क्यों नहीं लिया जाता? गया में हुई इस दर्दनाक घटना ने एक बार फिर निर्माण कार्यों में सुरक्षा की अनदेखी को उजागर कर दिया है। बालू के भारी दबाव के कारण कमजोर दीवार का गिरना लापरवाही का बड़ा उदाहरण है। इस घटना में एक मासूम बच्ची की जान चली गई और उसकी दादी गंभीर रूप से घायल हो गईं। प्रशासन को चाहिए कि इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए कड़े कदम उठाए जाएं, ताकि भविष्य में इस तरह के हादसे न हों।
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