जनपद पंचायत बुढ़ार में भ्रष्टाचार का ‘बड़ा खेला’, 25 लाख की पुलिया में लग रही अवैध रेत और घटिया सामग्री

शहडोल। जनपद पंचायत बुढ़ार के अंतर्गत ग्राम पंचायत घुनघुटा और गोडिनबूढ़ा में विकास कार्यों के नाम पर सरकारी खजाने को खुलेआम चूना लगाया जा रहा है। अतरौठी के जंगली नाले पर बन रही ₹25 लाख की लागत वाली पुलिया भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ती नजर आ रही है। आरोप है कि यहाँ न केवल घटिया सामग्री का उपयोग हो रहा है, बल्कि जनपद में वर्षों से जमे एक रसूखदार बाबू और अघोषित ठेकेदारों की जुगलबंदी ने पंचायत राज व्यवस्था को बंधक बना लिया है।

कमीशन का गणित और बाबू की ‘महेरवानी’
स्थानीय सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, जनपद पंचायत में पिछले 25 वर्षों से एक ही कुर्सी पर जमे बाबू रामजस पटेल का इस पूरे खेल में अहम किरदार बताया जा रहा है। आरोप है कि सरपंचों पर अनावश्यक दबाव बनाकर ‘उमेश शर्मा’ नामक अघोषित ठेकेदार को काम दिलाया जाता है। इस ‘कृपा’ के बदले स्वीकृत राशि का 10 प्रतिशत हिस्सा कमीशन के तौर पर वसूले जाने की चर्चाएं गर्म हैं।


मानकों की अनदेखी: बिना रॉयल्टी की रेत और सस्ता लोहा
मौके पर हो रहे निर्माण कार्य में तकनीकी मानकों की जमकर धज्जियां उड़ाई जा रही हैं:
अवैध उत्खनन: पुलिया निर्माण में जंगल के नालों से चोरी की गई मिट्टी युक्त रेत खपाई जा रही है। हाल ही में जैतपुर पुलिस द्वारा जब्त किए गए रेत के ट्रैक्टर इसी भ्रष्टाचार की कड़ी माने जा रहे हैं।
घटिया मटेरियल: निर्माण में ISI मार्का लोहे के बजाय स्थानीय स्तर का लोहा और बाजार की सस्ती सीमेंट का उपयोग किया जा रहा है, जिससे भविष्य में बड़ी दुर्घटना की आशंका बनी हुई है।


कागजी ट्रेडर्स: ‘उमेश ट्रेडर्स’ के पास न गोदाम है न दुकान, फिर भी बिना रॉयल्टी वाली रेत के पक्के बिल पंचायतों में धड़ल्ले से लगाए जा रहे हैं।
ईमानदार इंजीनियरों पर ट्रांसफर की गाज
भ्रष्टाचार का आलम यह है कि जो तकनीकी अधिकारी गलत काम का विरोध करते हैं, उन्हें रसूख के दम पर हटा दिया जाता है। गोडिनबूढ़ा पंचायत में जब एक इंजीनियर ने कम गहराई वाले कॉलम का मूल्यांकन करने से इनकार किया, तो कथित तौर पर बाबू की मदद से उनका तबादला करवाकर चहेते इंजीनियर की नियुक्ति करवा दी गई।


कलेक्टर और CEO से कार्रवाई की उम्मीद
अब बड़ा सवाल यह है कि क्या शहडोल कलेक्टर केदार सिंह और जिला पंचायत CEO शिवम प्रजापति इस संगठित भ्रष्टाचार पर लगाम लगाएंगे? क्या 25 सालों से एक ही स्थान पर जमे कर्मचारी की संपत्ति की जांच होगी? ग्रामीणों ने मांग की है कि घुनघुटा, कुम्हेडिन साखी और गोडिनबूढ़ा जैसी पंचायतों में हुए कार्यों की उच्च स्तरीय तकनीकी जांच कराई जाए।

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