कटनी। कटनी जिले के बड़वारा थाना अंतर्गत ग्राम रूपौद में स्थित जेके व्हाइट सीमेंट प्लांट एक बार फिर विवादों के घेरे मे है। सोमवार दोपहर कंपनी के एक पुराने श्रमिक ने अपनी पत्नी और दो मासूम बच्चों के साथ प्लांट के मुख्य द्वार पर धरना शुरू कर दिया। श्रमिक का आरोप है कि कंपनी प्रबंधन और स्थानीय बड़वारा पुलिस ने मिलीभगत कर उसके खिलाफ षड्यंत्र रचा और उसे झूठे केस में जेल भिजवा दिया। अब रिहा होने के बाद उसे काम पर वापस नहीं लिया जा रहा है, जिससे उसके परिवार के सामने भुखमरी की स्थिति पैदा हो गई है।
हक की आवाज उठाने पर ‘षडयंत्र’ का आरोप
धरने पर बैठे पीड़ित श्रमिक प्रदीप रजक ने बताया कि वह साल 2016 से लगातार जेके व्हाइट सीमेंट प्लांट में मजदूरी कर रहा था। प्रदीप के अनुसार, कुछ समय पूर्व उसने कंपनी में मजदूरों के साथ हो रहे शोषण और उनके अधिकारों के हनन के खिलाफ आवाज उठाते हुए कंपनी के खिलाफ प्रोटेस्ट किया था। आरोप है कि इसी बात से नाराज होकर कंपनी प्रबंधन ने बड़वारा पुलिस के साथ मिलकर उसके खिलाफ एक झूठा मुकदमा दर्ज कराया, जिसके चलते उसे जेल जाना पड़ा।
प्रदीप रजक का कहना है कि जेल से बाहर आने के बाद वह कई बार काम पर लौटने के लिए प्रबंधन के पास गया, लेकिन महीनों बीत जाने के बाद भी उसे गेट के अंदर प्रवेश नहीं दिया जा रहा है। प्रदीप ने कहा
मैने ईमानदारी से कंपनी की सेवा की, लेकिन आवाज उठाने की सजा मुझे और मेरे मासूम बच्चों को मिल रही है। मेरा पूरा परिवार अब सड़क पर आ गया है। अगर मुझे वापस काम पर नहीं रखा गया, तो मेरे पास सपरिवार आत्महत्या करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचेगा।
घटना की संवेदनशीलता को देखते हुए बड़वारा पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस के आला अधिकारी और जवान धरने पर बैठे परिवार को समझाने-बुझाने का प्रयास कर रहे हैं। हालांकि, श्रमिक अपनी मांग पर अड़ा हुआ है कि जब तक उसे ज्वाइनिंग नहीं दी जाती, वह गेट से नहीं हटेगा।



