जिला ब्यूरो प्रमुख/समाज जागरण
सोनभद्र। दिल्ली में हुए दर्दनाक हादसे में रेणुकूट निवासी अभिषेक कुमार की मौत से परिवार और क्षेत्र में शोक की लहर है। जिस बेटे के भविष्य को लेकर परिवार ने तमाम सपने संजोए थे, मंगलवार को उसी बेटे का पार्थिव शरीर वाराणसी के मणिकर्णिका घाट पहुंचा। गमगीन माहौल में परिजनों ने अभिषेक को अंतिम विदाई दी। इस दुख की घड़ी में परिवार ने ऐसा मानवीय निर्णय लिया, जिससे अभिषेक की याद हमेशा लोगों के बीच जीवित रहेगी। परिजनों ने अभिषेक की दोनों आंखों की कार्निया दान कर दी, जिससे दो जरूरतमंद लोगों को रोशनी मिलने की उम्मीद जगी है।
अभिषेक दिल्ली विश्वविद्यालय में बीकॉम द्वितीय वर्ष का छात्र था। वह परिवार में सबसे छोटा था और अपने माता-पिता के साथ रेणुकूट स्थित हिंडाल्को कॉलोनी में रहता था। उसके पिता हिंडाल्को में क्रेन ऑपरेटर के पद पर कार्यरत हैं। बड़ा भाई राजस्थान में बीटेक की पढ़ाई कर रहा है, जबकि बड़ी बहन की शादी हो चुकी है।
बेटे की मौत की खबर से परिवार में मचा कोहराम
हादसे के समय अभिषेक की मां अपने गांव गई हुई थीं। बेटे की मौत की खबर मिलते ही परिवार में कोहराम मच गया। हादसे की जानकारी मिलने के बाद परिजन अभिषेक का शव लेने दिल्ली पहुंचे। वहां बेटे को खोने के गहरे दुख के बीच परिवार ने उसकी आंखें दान करने का फैसला लिया।
परिजनों के इस फैसले के बाद अभिषेक की दोनों आंखों की कार्निया दान कराई गई। परिवार का कहना है कि उनका बेटा भले ही अब इस दुनिया में नहीं है, लेकिन उसकी आंखों से किसी जरूरतमंद की जिंदगी में उजाला आ सकेगा। यही सोच इस कठिन समय में परिवार को कुछ सांत्वना दे रही है।
चंदौली के झांसी गांव का मूल निवासी था अभिषेक
अभिषेक मूल रूप से चंदौली जिले के झांसी गांव का रहने वाला था। पढ़ाई के सिलसिले में वह दिल्ली में रह रहा था और दिल्ली विश्वविद्यालय में बीकॉम द्वितीय वर्ष की पढ़ाई कर रहा था। परिवार के लिए अभिषेक की असमय मौत किसी बड़े सदमे से कम नहीं है।
पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी होने के बाद मंगलवार सुबह अभिषेक का पार्थिव शरीर वाराणसी लाया गया। पिता एंबुलेंस से बेटे का शव लेकर मणिकर्णिका घाट पहुंचे, जहां अंतिम संस्कार किया गया।
अंतिम विदाई के बीच मानवता की मिसाल
मणिकर्णिका घाट पर एक ओर परिवार बेटे को अंतिम विदाई देने के गम में डूबा था, वहीं दूसरी ओर अभिषेक की आंखों के जरिए दो लोगों को नई रोशनी मिलने की उम्मीद इस दुखद घटना को मानवता की मिसाल बना रही थी।
अभिषेक की मौत से रेणुकूट की हिंडाल्को कॉलोनी और उसके पैतृक गांव झांसी में शोक की लहर है। कम उम्र में दुनिया से विदा हुए अभिषेक ने जाते-जाते अंगदान की प्रेरणादायी मिसाल छोड़ दी। उसकी आंखों से किसी की दुनिया रोशन हो सकेगी—यही उम्मीद अब उसके परिवार और शुभचिंतकों के लिए उसकी आखिरी याद बन गई है।
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