अधिवक्ता संघ बुढार के तत्वाधान में आयोजित किया गया विदाई समारोह
एडीजे सहित वरिष्ठ एवं कनिष्ठ अधिवक्ताओं की रही उपस्थिति
यहां पर किया गया कार्य सदैव स्मृतियों में जीवंत रहेगा – न्यायधीश ऋषभ दीक्षित
विजय तिवारी
बुढार
अधिवक्ता संघ बुढार-धनपुरी के द्वारा अपर एवं जिला सत्र न्यायालय बुढार में पदस्थ न्यायधीश श्री ऋषभ दीक्षित एवं न्यायधीश सुश्री आकांक्षा टेकाम के स्थानांतरण पर भावभीनी विदाई समारोह का आयोजन किया गया जिसमें बुढार धनपुरी अमलाई के सभी वरिष्ठ एवं कनिष्ठ अधिवक्ताओं के द्वारा उन्हें उनके स्वर्णिम कार्यकाल की बधाई दी गई एवं उनके आचरण की प्रसंशा करते हुए उन्हे भावभीनी विदाई देकर शॉल श्रीफल भेंटकर सम्मानित किया गया और उनके अविस्मरणीय योगदान की सराहना की गई अधिवक्ता संघ बुढार/धनपुरी के द्वारा आयोजित विदाई कार्यक्रम में मुख्य रूप से अधिवक्ता संघ बुढार के अध्यक्ष श्री जयकांत मिश्रा के द्वारा सफल मंच संचालन किया गया साथ ही कार्यक्रम में विदाई समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में वरिष्ठ न्यायधीश एडीजे श्री सुशील कुमार अग्रवाल न्यायधीश श्री लक्ष्मण रोहित की गरिमामई उपस्थिति रही वरिष्ठ अधिवक्तागणो में मुख्य रूप से पूर्व अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष श्री रावेंद्र तिवारी श्री आलोक राय श्री सुशील मिश्रा श्री सतेंद्र शुक्ला श्री श्री अजय सोनी सुशील कुमार मिश्रा श्री अनुज सिंह परिहार श्री सीताराम गुप्ता श्री रमेश चंद्र त्रिपाठी मयूर मिश्रा संतशरण मिश्रा बृजेश शुक्ला बृजेश गौतम रामकृष्ण गुप्ता पराग जैन श्रीमती रेखा गुप्ता रीना पैट्रिक प्रेम पाल दीपिका यादव धनेश्वरी सिंह शंकरलाल लोधी प्रांजल मिश्र रामपुरन लोधी श्री निलेश सिंह कामता रौतेल प्रकाश रौतेल अमित चौरसिया मनोज श्रीवास्तव जनक कुशवाहा रामकृष्ण गुप्ता मनोज तिवारी तेजराज सिंह नारायण शुक्ला शुभम जैन की गरिमामई उपस्थिति रही
साथ ही धनपुरी नगर पालिका परिषद के पूर्व मुख्य नगर पालिका अधिकारी एवं वरिष्ठ समाजसेवी रविकरण त्रिपाठी भी उपस्थित रहे और कार्यक्रम की शोभा बढ़ायी
गणमान्य जनों का प्रेरक रहा उद्बोधन
अपने विदाई समारोह में आयोजित कार्यक्रम में न्यायधीश सुश्री आकांक्षा टेकाम ने कहा की बुढार अपर एवं जिला सत्र न्यायालय में मेरा कार्यकाल आप सभी के सहयोग से बेहद अविष्मरणीय रहा यहां पर लगातार अधिवक्ताओं का सहयोग प्राप्त होता रहा है और कभी भी अधिवक्ता और न्यायधीश के बीच में किसी भी प्रकार से संघर्ष और वैमनस्यता की स्थिति पैदा नहीं हुई जो की सबसे अनुकरणीय और आत्मसात करने योग्य बात है
तत्पश्चात युवा तरुणायी के आदर्श मार्गदर्शक न्यायधीश श्री ऋषभ दीक्षित ने अपने प्रेरक उद्बोधन में कहा की मेरा बुढार में यह कार्यकाल कई प्रकार की शिक्षा को प्राप्त करने जैसा रहा है यहां पर कभी भी किसी के भी साथ मतभेद और मनभेद की स्थिति पैदा नहीं हुई मैंने अपने कार्यों को पूर्णतः विधि अनुरूप स्वतंत्रता से निष्पक्षता से संपादित किया और आम जन की भलाई हेतु जब कभी वरिष्ठ अधिवक्ताओं की आवश्यकता हुई तो उनसे भी सीखकर अपने दायित्व को और गंभीरता और पारदर्शी बनाने की कोशिश की ताकि किसी भी प्रकार से माननीय न्यायालय पर कोई प्रश्नवाचक चिन्ह ना लग सके शोषित वंचित उपेक्षित और कमजोर व्यक्ति के लिए न्यायलय एक महत्वपूर्ण स्थान होता है आशा है की मैं आगे भी अपने कर्तव्यों का निर्वहन शुद्ध अंतःकरण से करूंगा और आप सभी को अपनी स्मृतियों में जीवंत रखूंगा
तत्पश्चात एडीजे श्री सुशील कुमार अग्रवाल ने कहा की माननीय न्यायालय संविधान का सबसे बड़ा मंदिर है यहां पर लगातार कई बातें सीखने और समझने को मिलती है कभी में तनाव ग्रस्त होता हूं तो कभी तनाव मुक्त लेकिन आमजन की समस्याओं का निवारण साथ ही सभी को सामान्य न्याय प्राप्त हो किसी के साथ कोई भेदभाव ना हो हमेशा यह बात मेरे दिमाग में अंकित होती है निष्पक्ष निर्णय से एक सर्वव्यापी और सुनहरे समाज का निर्माण होता है जिसमे अधिवक्ताओं का पत्रकारों का योगदान अहम है आप सभी का सहयोग निरंतर मुझे प्राप्त हुआ है और आगे भी होता रहे उन्होंने श्री ऋषभ दीक्षित एवं सुश्री आकांक्षा टेकाम एवं सभी अधिवक्ताओं के भविष्य की उज्ज्वल कामनाएं करते हुए अपनी वाणी को विराम दिया



