अनूपपुर में ₹28 करोड़ की राजस्व वसूली पर खनिज विभाग की रहस्यमय चुप्पी, क्या सांठगांठ का जारी है खेल?

पूर्व कलेक्टर चंद्र मोहन ठाकुर के चचाई आबाद रेत अवैध उत्खनन मे कमलेश सिंह चंदेल पर लगाया था जुर्माना

आदेश के 7 साल बाद भी खजाना खाली इंस्पेक्टर ईशा वर्मा के ‘स्टे’ के दावों पर उठे सवाल

खनिज विभाग की लेडी सिंघम या माफियाओं की ढाल? ईशा वर्मा के राज में आखिर क्यों लूटा जा रहा है ₹28 करोड़ का राजस्व

इंट्रो -सरकारी खजाना खाली है विकास कार्य रुके हैं लेकिन अनूपपुर खनिज विभाग कुंभकर्णी नींद में सोया है। चचाई आबाद रेत उत्खनन मामले में 28 करोड़ 31 लाख रुपये का जुर्माना सात सालों से फाइलों के नीचे दबा है। क्या खनिज इंस्पेक्टर ईशा वर्मा का ‘स्टे’ वाला दावा महज एक ढाल है या फिर दोषियों को बचाने की कोई बड़ी ‘सांठगांठ’? जब जिला शिक्षा और स्वास्थ्य के लिए तरस रहा है तब विभाग की यह रहस्यमयी चुप्पी सीधे तौर पर प्रशासन की नीयत पर सवालिया निशान लगा रही है।
राजकुमार सिंह


अनूपपुर। जिले में भ्रष्टाचार और सरकारी राजस्व की अनदेखी का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। ग्राम चचाई आबाद सोन नदी में हुए करीब 94,390 घन मीटर रेत के अवैध उत्खनन मामले में दोषी पर लगाया गया 28,31,70,000 (अट्ठाइस करोड़ इकतीस लाख सत्तर हजार रुपये) का भारी-भरकम जुर्माना अब तक सरकारी खजाने में नहीं पहुंचा है। एक तरफ जिला प्रशासन फंड की कमी का रोना रोता है, वहीं दूसरी ओर विभाग की नाक के नीचे करोड़ों की वसूली लंबित पड़ी है।

यह है मामला

कमलेश सिंह चंदेल (कलेक्टर न्यायालय प्रकरण क्र. 41/बी-121/2016-17)।जुर्माना रायल्टी की 30 गुना दर से ₹28,31,70,000। प्रतिबंधित पोकलेन मशीनों से स्वीकृत क्षेत्र के बाहर अवैध उत्खनन। यदि राशि जमा नहीं हुई है, तो तत्काल संपत्ति कुर्क की जाए और दोषियों पर नई कानूनी धाराएं लगाई जाएं। यह चौक चौराहे में मांग उठ रही है!अब देखना यह है कि नए कलेक्टर इस “वित्तीय और पर्यावरणीय भ्रष्टाचार” पर क्या कड़ा रुख अपनाते हैं या फिर विभाग की फाइलें इसी तरह धूल फांकती रहेंगी।

शिक्षा और स्वास्थ्य का सवर सकता है भविष्य

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह 28 करोड़ की राशि वसूल कि जाती है तो जिले की शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं की सूरत बदल सकती है। इस राशि से जिले में आधुनिक अस्पताल, स्कूलों में बुनियादी ढांचा और विकास की नई गति मिल सकती है। लेकिन खनिज विभाग की सुस्ती जिले के विकास में बाधक बनी हुई है।

इंस्पेक्टर ईशा वर्मा के ‘स्टे’ के दावे पर बवाल

इस पूरे प्रकरण में सबसे चौंकाने वाला पहलू खनिज विभाग की भूमिका है। जब मीडिया द्वारा इस संबंध में खनिज इंस्पेक्टर ईशा वर्मा से बात की गई तो उक्त मामले में ‘स्टे’ स्थगन आदेश होने की बात कहकर पल्ला झाड़ लिया गया।सवाल यह उठता है कि यदि माननीय न्यायालय से स्टे मिला है, तो विभाग इसे सार्वजनिक क्यों नहीं कर रहा? क्या स्टे की आड़ में दोषियों को संरक्षण दिया जा रहा है? क्या खनिज विभाग राजस्व वसूली में पूरी तरह फिसड्डी साबित हो चुका है?

पत्रकारों की मांग- प्रेस कॉन्फ्रेंस कर यथा स्थिति से कराय अवगत

यदि स्टे मिला है तो खनिज विभाग को तत्काल प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाकर पत्रकारों के सामने दस्तावेजी साक्ष्य प्रस्तुत करने चाहिए, ताकि प्रशासनिक पारदर्शिता बनी रहे।वर्षों से एक ही पद पर जमीं ईशा वर्मा की कार्यप्रणाली पर सवाल जिले में यह चर्चा आम है कि खनिज इंस्पेक्टर ईशा वर्मा वर्षों से अनूपपुर खनिज विभाग में टिकी हुई हैं। उनकी कार्यप्रणाली और वसूली की धीमी रफ्तार को लेकर अब उंगलियां उठने लगी हैं। आखिर क्या कारण है कि करोड़ों के राजस्व के नुकसान के बावजूद विभाग ने अब तक दोषी की संपत्तियां कुर्क करने की कार्रवाई शुरू नहीं की?

कुर्सी से ऐसा क्या मोह? अनूपपुर में वर्षों से जमीं इंस्पेक्टर ईशा वर्मा

सरकारी तंत्र में नियम है कि एक निश्चित समय के बाद अधिकारियों का तबादला होना चाहिए ताकि पारदर्शिता बनी रहे, लेकिन अनूपपुर खनिज विभाग में इंस्पेक्टर ईशा वर्मा एक अपवाद बन चुकी हैं। जिले की सरहदों से रेत की अवैध तस्करी और केवई व सोन नदी का सीना छलनी होने की खबरें आम हैं और इन सबके बीच ईशा वर्मा के लंबे कार्यकाल ने अब संदेह के घेरे को और गहरा कर दिया है।

तबादलों के दौर में भी अंगद की तरह जमी हैं ईशा वर्मा

​अनूपपुर में कई कलेक्टर आए और गए, खनिज विभाग के आला अफसर बदल गए लेकिन ईशा वर्मा की कुर्सी अंगद का पैर साबित हो रही है। जिले के चौक-चौराहों और गलियारों में यह चर्चा आम है कि आखिर ऐसी क्या मजबूरी या रसूख है, जो वर्षों बीत जाने के बाद भी विभाग उन्हें यहाँ से हिला नहीं सका? क्या यह उनकी कार्यक्षमता है या फिर पर्दे के पीछे चल रहा कोई बड़ा मैनेजमेंट?

इनका कहना है

उक्त मामले में कोर्ट से स्टे मिला हुआ है कोर्ट के मामले में हम कोई भी हस्तक्षेप नहीं कर सकते आप लोगों को आधी अधूरी जानकारी रहती है पहले जानकारी लें फिर बात करें!

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