अनूपपुर। सर्वोच्च न्यायालय के सख्त रुख और पर्यावरण संरक्षण के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद मध्य प्रदेश के अनूपपुर जिले में अवैध रेत खनन का खेल बेखौफ जारी है। शिकायतों और स्थानीय चर्चाओं के मुताबिक, सोन और केवई नदियों का सीना चीरकर ठेकेदारों द्वारा नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं, जबकि प्रशासन रहस्यमयी खामोशी ओढ़े बैठा है।
3 किलोमीटर तक फैला अवैध खनन, कागजों और जमीन में भारी अंतर
खनिज विभाग के दस्तावेजों में सीमित क्षेत्र में आवंटन दिखाया गया है, लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल उलट नजर आ रही है। आरोप है कि कदमसरा, पसला और मानपुर तक करीब 3 किलोमीटर के दायरे में नदी का भूगोल ही बदल दिया गया है।
यदि सैटेलाइट मैपिंग और ड्रोन सर्वे कराया जाए तो इस कथित गड़बड़ी की सच्चाई उजागर हो सकती है, लेकिन विभागीय मॉनिटरिंग केवल कागजों और एसी कमरों तक सीमित बताई जा रही है।
एनजीटी नियमों को चुनौती, सूखने की कगार पर नदियां
सोन और केवई नदियों में भारी मशीनों से हो रहा खनन पर्यावरण के लिए गंभीर खतरा बन चुका है। आरोप है कि नदी के बीच से रेत निकालने के चलते जलस्तर तेजी से गिर रहा है, जिससे आने वाले समय में कोतमा और आसपास के क्षेत्रों में जल संकट गहराने की आशंका है।
एनजीटी के सख्त नियमों के बावजूद इस तरह का खनन प्रशासनिक उदासीनता पर सवाल खड़े करता है।
28 करोड़ के जुर्माने पर ‘कुंडली’, वसूली पर सवाल
चचाई क्षेत्र से जुड़ी 28 करोड़ रुपये की जुर्माना फाइल भी संदेह के घेरे में है। बताया जा रहा है कि यह फाइल लंबे समय से ठंडे बस्ते में पड़ी है।
‘प्रदूषण करने वाला ही हर्जाना भरेगा’ जैसे नियम यहां निष्प्रभावी नजर आ रहे हैं, जिससे सरकारी राजस्व को भारी नुकसान होने की आशंका जताई जा रही है।
खनिज निरीक्षक की भूमिका पर उठे सवाल
अनूपपुर में लंबे समय से पदस्थ खनिज निरीक्षक ईशा वर्मा की कार्यप्रणाली को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय स्तर पर चर्चा है कि लंबे समय तक एक ही स्थान पर रहने से विभाग और ठेकेदार के बीच कथित गठजोड़ पनप गया है।
अब मांग उठ रही है कि सीमांकन और कार्यकाल की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए।
EOW-लोकायुक्त की चुप्पी, इंटेलिजेंस तंत्र फेल
इतने बड़े आरोपों के बावजूद आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) और लोकायुक्त जैसी एजेंसियों की निष्क्रियता भी सवालों के घेरे में है।
जनचर्चा है कि स्थानीय स्तर से सही जानकारी शीर्ष स्तर तक नहीं पहुंच पा रही, जिससे कार्रवाई नहीं हो रही है।



