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RailNews: टाटानगर स्टेशन पर यात्रियों का फूटा गुस्सा: रेलवे के खिलाफ हस्ताक्षर अभियान से विरोध तेज

दैनिक समाज जागरण | 26.04.2026 | चांद कुमार लायेक (ब्यूरो चीफ), पूर्वी सिंहभूम, जमशेदपुर


जमशेदपुर: टाटानगर रेलवे स्टेशन पर रविवार को रेल यात्रियों का आक्रोश खुलकर सामने आया, जब लगातार ट्रेनों की लेटलतीफी और अव्यवस्थित संचालन के खिलाफ बड़ा हस्ताक्षर अभियान चलाया गया। यह अभियान रेल यात्री संघर्ष समिति के बैनर तले आयोजित किया गया, जिसमें सैकड़ों यात्रियों, स्थानीय नागरिकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भाग लेकर रेलवे प्रशासन के खिलाफ नाराजगी जताई।

पिछले कई दिनों से टाटानगर स्टेशन पर ट्रेनों की स्थिति बेहद खराब बनी हुई है। यात्रियों का आरोप है कि केवल 4 किलोमीटर की दूरी तय करने में ट्रेनों को 3 से 4 घंटे तक लग रहे हैं। इस देरी ने यात्रियों के धैर्य को तोड़ दिया है, खासकर भीषण गर्मी में ट्रेन के भीतर घंटों फंसे रहना स्थिति को और गंभीर बना रहा है।

हस्ताक्षर अभियान के दौरान यात्रियों ने खुलकर अपनी समस्याएं साझा कीं। उनका कहना था कि ट्रेन लेटलतीफी के कारण यात्रा बेहद कष्टदायक हो गई है और समय पर गंतव्य तक पहुंचना लगभग असंभव होता जा रहा है। नौकरीपेशा लोग, छात्र, मरीज और व्यवसायी सबसे अधिक प्रभावित हो रहे हैं।

यात्रियों ने यह भी आरोप लगाया कि रेलवे द्वारा समय पर सही जानकारी नहीं दी जाती। ट्रेन कब आएगी, कितनी देर होगी—इसकी स्पष्ट सूचना नहीं मिलती, जिससे प्लेटफॉर्म पर अफरा-तफरी का माहौल बना रहता है। साथ ही यात्रियों की सुविधा जैसे पानी, पंखा और स्वच्छता की भारी कमी भी सामने आई।

रेल यात्री संघर्ष समिति के पदाधिकारियों ने कहा कि रेलवे प्रशासन की प्राथमिकता यात्रियों की सुविधा से अधिक केवल संचालन तक सीमित हो गई है। उन्होंने कहा कि जब एक ट्रेन कुछ किलोमीटर चलने में घंटों लगाती है, तो यह रेलवे प्रबंधन पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

इस अभियान में विधायक सरयू राय भी मौजूद रहे। उन्होंने कहा कि रेलवे को यात्रियों की सुविधा और समयबद्धता को प्राथमिकता देनी चाहिए। यदि जल्द सुधार नहीं हुआ तो इस मुद्दे को उच्च स्तर पर उठाया जाएगा।

समिति ने बताया कि जल्द ही ज्ञापन तैयार कर रेलवे के वरिष्ठ अधिकारियों को सौंपा जाएगा, जिसमें ट्रेन संचालन सुधार, स्टेशन पर जाम की समस्या और बुनियादी सुविधाओं में सुधार की मांग शामिल होगी।

यात्रियों का कहना है कि उनका उद्देश्य केवल विरोध नहीं बल्कि समस्या का समाधान है। लेकिन यदि स्थिति नहीं सुधरी तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।

टाटानगर जैसे महत्वपूर्ण जंक्शन पर इस तरह की अव्यवस्था ने रेलवे की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना होगा कि रेलवे प्रशासन इस बढ़ते जनआक्रोश पर क्या कदम उठाता है।

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