GPM के लकड़ी तस्कर बेलगाम
जितेंद्र शर्मा
कोरबा। कटघोरा वनमंडल के अंतर्गत पसान क्षेत्र के ग्राम कोटमर्रा में नीलगिरी प्लांटेशन अब तस्करों के निशाने पर है। कंपार्टमेंट नंबर पी-188 में लगे लगभग 150 से 200 हरे-भरे वृक्षों की बेरहमी से कटाई कर तस्करी की जा रही है। आरोपों की मानें तो यह संगठित अपराध गौरेला-पेंड्रा-मरवाही (GPM) से जुड़े लकड़ी तस्करों द्वारा संचालित किया जा रहा है — और सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि वन विभाग के अधिकारी खुद इनकी राह आसान कर रहे हैं।
वाहन पकड़ा, लेकिन ‘लेन-देन’ कर छोड़ दिया गया!
स्थानीय ग्रामीणों ने साहस दिखाते हुए लकड़ी से भरे वाहन को पकड़ा और इसकी सूचना रेंजर आर. एन. ददावत को दी। अधिकारी मौके पर पहुंचे जरूर, लेकिन स्थानीय लोगों का आरोप है कि कुछ लेन-देन कर वाहन को बिना किसी कार्रवाई के छोड़ दिया गया। यह घटना वन विभाग की नीयत और जिम्मेदारी दोनों पर बड़ा सवाल खड़ा करती है।
वन समिति अध्यक्ष ने खोली पोल
वन प्रबंधन समिति के अध्यक्ष लक्ष्मी प्रसाद ने साफ कहा कि विभाग द्वारा लगातार ग्रामीणों के विरोध को नजरअंदाज कर तस्करों को खुला समर्थन दिया जा रहा है। उनके अनुसार, “वन विभाग की शह से ही तस्करों का मनोबल इतना बढ़ गया है कि वे खुलेआम जंगल में घुसकर इमारती महत्व के पेड़ काट रहे हैं।”
प्रशासन पर उठे सवाल, ग्रामीणों की चेतावनी
गांववासियों का कहना है कि यदि जल्द ही इस अवैध तस्करी पर रोक नहीं लगाई गई तो वे जन आंदोलन का रास्ता अपनाएंगे। सवाल यह भी है कि क्या वन विभाग खुद तस्करी का भागीदार बन चुका है?
यदि जंगलों की यह लूट ऐसे ही चलती रही, तो आने वाले वर्षों में हरियाली केवल तस्वीरों में ही दिखाई देगी।
क्या कहता है शासन?
अब देखना यह है कि जिला प्रशासन और शासन इस गंभीर मामले में क्या कार्रवाई करता है, या फिर यह मामला भी भ्रष्टाचार की धूल में दबा दिया जाएगा?
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