दैनिक समाज जागरण 26.05.2026 चांद कुमार लायेक (ब्यूरो चीफ) पूर्वी सिंहभूम जमशेदपुर
जमशेदपुर के आत्महत्या निवारण केंद्र जीवन के वालंटियर्स ने एनआईटी परिसर में आयोजित 10 दिवसीय समर कैंप के दौरान लगभग 550 एनसीसी कैडेट्स के लिए “इमोशनली एम्पावरिंग वनसेल्फ” विषय पर डेढ़ घंटे का इंटरैक्टिव सत्र आयोजित किया। कार्यक्रम का उद्देश्य युवाओं में मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाना और उन्हें अपनी भावनाओं को समझने तथा खुलकर साझा करने के लिए प्रेरित करना था। सत्र में कैडेट्स ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े कई महत्वपूर्ण पहलुओं पर जानकारी प्राप्त की।
कार्यक्रम की शुरुआत एक रोचक और भावनात्मक गतिविधि से हुई, जिसमें सभी कैडेट्स को अपने जीवन के सबसे खुशहाल पल को याद करने के लिए कहा गया। इस गतिविधि के माध्यम से युवाओं को सकारात्मक भावनाओं से जुड़ने और अपने भीतर की खुशी को महसूस करने का अवसर मिला। वालंटियर्स ने बताया कि जीवन में कठिन परिस्थितियों के बीच भी सकारात्मक यादें मानसिक संतुलन बनाए रखने में मदद करती हैं।
सत्र के दौरान वालंटियर्स ने मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े सामाजिक कलंक पर चर्चा करते हुए कहा कि आज भी समाज में लोग मानसिक तनाव, अवसाद या भावनात्मक परेशानियों पर खुलकर बात करने से हिचकिचाते हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि भावनात्मक स्वास्थ्य भी शारीरिक स्वास्थ्य जितना ही महत्वपूर्ण है और इसके प्रति जागरूक होना समय की आवश्यकता है। वक्ताओं ने युवाओं को यह समझाने का प्रयास किया कि मानसिक परेशानियों को छिपाने के बजाय समय रहते सहायता लेना अधिक जरूरी है।
कैडेट्स को तनाव और दैनिक जीवन में आने वाले दबावों के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। वक्ताओं ने बताया कि पढ़ाई, करियर, पारिवारिक अपेक्षाएं और सामाजिक प्रतिस्पर्धा जैसी परिस्थितियां युवाओं में तनाव का कारण बन सकती हैं। उन्होंने भावनात्मक संकट के शारीरिक और मानसिक संकेतों की पहचान करने के बारे में भी बताया। लगातार उदासी, चिड़चिड़ापन, अकेलापन महसूस करना, आत्मविश्वास में कमी और अनिद्रा जैसी समस्याओं को नजरअंदाज नहीं करने की सलाह दी गई।
वालंटियर्स ने जीवन संस्था की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए कहा कि संस्था भावनात्मक सहयोग और काउंसलिंग सहायता उपलब्ध कराती है। उन्होंने कैडेट्स से अपील की कि यदि वे स्वयं या उनके आसपास कोई व्यक्ति मानसिक तनाव से गुजर रहा हो, तो मदद लेने में संकोच न करें। उन्होंने यह भी कहा कि किसी व्यक्ति की बात ध्यान से सुनना और उसका भावनात्मक सहयोग करना कई बार उसकी जिंदगी बचा सकता है।
कार्यक्रम में कैडेट्स और वक्ताओं के बीच खुला संवाद भी हुआ। युवाओं ने मानसिक तनाव, पढ़ाई के दबाव और भावनात्मक समस्याओं से जुड़े प्रश्न पूछे, जिनका वालंटियर्स ने सहज और व्यावहारिक तरीके से उत्तर दिया। इससे कैडेट्स को अपनी भावनाओं को समझने और मानसिक स्वास्थ्य के महत्व को करीब से जानने का अवसर मिला।
सत्र के अंत में सभी प्रतिभागियों ने अपने मानसिक स्वास्थ्य का ध्यान रखने और दूसरों को भी भावनात्मक सहयोग देने की शपथ ली। वालंटियर्स ने भावनात्मक रूप से सशक्त बनने के लिए कुछ महत्वपूर्ण सुझाव भी साझा किए। उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति को नियमित रूप से स्वयं के साथ समय बिताना चाहिए, अपनी ताकत और कमजोरियों को समझना चाहिए तथा जीवन की परिस्थितियों के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि कभी-कभी परेशान महसूस करना सामान्य बात है और मानसिक स्वास्थ्य पर खुलकर चर्चा करना साहस का प्रतीक है।
जीवन के स्वयंसेवकों ने बताया कि संस्था भावनात्मक कठिनाइयों से जूझ रहे लोगों की सहायता के लिए हमेशा उपलब्ध है। आमने-सामने बातचीत के इच्छुक लोग बिष्टुपुर स्थित 25 क्यू रोड केंद्र में प्रतिदिन सुबह 10 बजे से शाम 6 बजे तक संपर्क कर सकते हैं। वहीं तत्काल सहायता के लिए 9297777499 और 9297777500 हेल्पलाइन नंबरों पर फोन या व्हाट्सऐप के माध्यम से भी संपर्क किया जा सकता है। मानसिक स्वास्थ्य का महत्व जमशेदपुर के आत्महत्या निवारण केंद्र जीवन के वालंटियर्स ने एनआईटी परिसर में आयोजित 10 दिवसीय समर कैंप के दौरान लगभग 550 एनसीसी कैडेट्स के लिए “इमोशनली एम्पावरिंग वनसेल्फ” विषय पर डेढ़ घंटे का इंटरैक्टिव सत्र आयोजित किया। कार्यक्रम का उद्देश्य युवाओं में मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाना और उन्हें अपनी भावनाओं को समझने तथा खुलकर साझा करने के लिए प्रेरित करना था। सत्र में कैडेट्स ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े कई महत्वपूर्ण पहलुओं पर जानकारी प्राप्त की।
कार्यक्रम की शुरुआत एक रोचक और भावनात्मक गतिविधि से हुई, जिसमें सभी कैडेट्स को अपने जीवन के सबसे खुशहाल पल को याद करने के लिए कहा गया। इस गतिविधि के माध्यम से युवाओं को सकारात्मक भावनाओं से जुड़ने और अपने भीतर की खुशी को महसूस करने का अवसर मिला। वालंटियर्स ने बताया कि जीवन में कठिन परिस्थितियों के बीच भी सकारात्मक यादें मानसिक संतुलन बनाए रखने में मदद करती हैं।
सत्र के दौरान वालंटियर्स ने मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े सामाजिक कलंक पर चर्चा करते हुए कहा कि आज भी समाज में लोग मानसिक तनाव, अवसाद या भावनात्मक परेशानियों पर खुलकर बात करने से हिचकिचाते हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि भावनात्मक स्वास्थ्य भी शारीरिक स्वास्थ्य जितना ही महत्वपूर्ण है और इसके प्रति जागरूक होना समय की आवश्यकता है। वक्ताओं ने युवाओं को यह समझाने का प्रयास किया कि मानसिक परेशानियों को छिपाने के बजाय समय रहते सहायता लेना अधिक जरूरी है।
कैडेट्स को तनाव और दैनिक जीवन में आने वाले दबावों के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। वक्ताओं ने बताया कि पढ़ाई, करियर, पारिवारिक अपेक्षाएं और सामाजिक प्रतिस्पर्धा जैसी परिस्थितियां युवाओं में तनाव का कारण बन सकती हैं। उन्होंने भावनात्मक संकट के शारीरिक और मानसिक संकेतों की पहचान करने के बारे में भी बताया। लगातार उदासी, चिड़चिड़ापन, अकेलापन महसूस करना, आत्मविश्वास में कमी और अनिद्रा जैसी समस्याओं को नजरअंदाज नहीं करने की सलाह दी गई।
वालंटियर्स ने जीवन संस्था की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए कहा कि संस्था भावनात्मक सहयोग और काउंसलिंग सहायता उपलब्ध कराती है। उन्होंने कैडेट्स से अपील की कि यदि वे स्वयं या उनके आसपास कोई व्यक्ति मानसिक तनाव से गुजर रहा हो, तो मदद लेने में संकोच न करें। उन्होंने यह भी कहा कि किसी व्यक्ति की बात ध्यान से सुनना और उसका भावनात्मक सहयोग करना कई बार उसकी जिंदगी बचा सकता है।
कार्यक्रम में कैडेट्स और वक्ताओं के बीच खुला संवाद भी हुआ। युवाओं ने मानसिक तनाव, पढ़ाई के दबाव और भावनात्मक समस्याओं से जुड़े प्रश्न पूछे, जिनका वालंटियर्स ने सहज और व्यावहारिक तरीके से उत्तर दिया। इससे कैडेट्स को अपनी भावनाओं को समझने और मानसिक स्वास्थ्य के महत्व को करीब से जानने का अवसर मिला।
सत्र के अंत में सभी प्रतिभागियों ने अपने मानसिक स्वास्थ्य का ध्यान रखने और दूसरों को भी भावनात्मक सहयोग देने की शपथ ली। वालंटियर्स ने भावनात्मक रूप से सशक्त बनने के लिए कुछ महत्वपूर्ण सुझाव भी साझा किए। उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति को नियमित रूप से स्वयं के साथ समय बिताना चाहिए, अपनी ताकत और कमजोरियों को समझना चाहिए तथा जीवन की परिस्थितियों के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि कभी-कभी परेशान महसूस करना सामान्य बात है और मानसिक स्वास्थ्य पर खुलकर चर्चा करना साहस का प्रतीक है।
जीवन के स्वयंसेवकों ने बताया कि संस्था भावनात्मक कठिनाइयों से जूझ रहे लोगों की सहायता के लिए हमेशा उपलब्ध है। आमने-सामने बातचीत के इच्छुक लोग बिष्टुपुर स्थित 25 क्यू रोड केंद्र में प्रतिदिन सुबह 10 बजे से शाम 6 बजे तक संपर्क कर सकते हैं। वहीं तत्काल सहायता के लिए 9297777499 और 9297777500 हेल्पलाइन नंबरों पर फोन या व्हाट्सऐप के माध्यम से भी संपर्क किया जा सकता है।



