समाज जागरण पटना जिला संवाददाता:- वेद प्रकाश
पटना/ बिहार में सरकारी जमीन की अवैध खरीद-बिक्री और निजी हस्तांतरण पर अब पूरी तरह से लगाम लगाने की तैयारी कर ली गई है। नीतीश कुमार सरकार ने एक बड़ा और अहम फैसला लेते हुए राज्य भर में सरकारी भूमि की खरीद-बिक्री पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। यह निर्णय भू-माफियाओं के बढ़ते नेटवर्क और सरकारी जमीन के अवैध हस्तांतरण के मामलों को देखते हुए लिया गया है। सरकार ने साफ संकेत दिया है कि अब सरकारी जमीन से जुड़े किसी भी प्रकार के गड़बड़झाले को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने इस संबंध में सभी प्रमंडलीय आयुक्तों, जिलाधिकारियों, अनुमंडल पदाधिकारियों और अंचल अधिकारियों को पत्र जारी कर स्पष्ट निर्देश दिए हैं। पत्र में कहा गया है कि सरकारी भूमि के अवैध निजी हस्तांतरण, दाखिल-खारिज और जमाबंदी सृजन जैसे मामलों पर तत्काल रोक लगाई जाए और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। मुख्य सचिव द्वारा जारी पत्र में यह स्पष्ट किया गया है कि हाल के वर्षों में राज्य के विभिन्न जिलों से ऐसे कई मामले सामने आए हैं, जिनमें सरकारी भूमि को निजी व्यक्तियों के नाम अवैध रूप से दर्ज कर दिया गया। कई मामलों में क्षेत्रीय राजस्व अधिकारियों की मिलीभगत से सरकारी जमीन पर अवैध जमाबंदी बना दी गई और फिर उसकी खरीद-बिक्री कर दी गई। सरकार ने इसे न केवल नियमों के विरुद्ध बल्कि पूरी तरह अनैतिक और जनहित के खिलाफ बताया है। पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि सरकारी जमीन आम जनता की संपत्ति होती है, जिसका उपयोग जनकल्याण के कार्यों के लिए किया जाना चाहिए। ऐसे में उसका निजी स्वार्थ के लिए दुरुपयोग राज्य के संसाधनों पर सीधा हमला है। सरकार की समीक्षा में यह भी सामने आया है कि सिर्फ सामान्य सरकारी भूमि ही नहीं, बल्कि सुयोग्य श्रेणी के वासभूमिहीन परिवारों और व्यक्तियों को आवंटित की गई जमीन की भी अवैध खरीद-बिक्री की गई है। इसमें गैर मजरूआ खास, गैर मजरूआ आम, भूमि सीलिंग की अधिशेष जमीन और बिहार विशेषाधिकार प्राप्त व्यक्ति वासभूमि अभिघृति अधिनियम, 1947 के तहत आवंटित भूमि शामिल है। इन जमीनों का उद्देश्य गरीब और भूमिहीन परिवारों को आवास उपलब्ध कराना था, लेकिन भू-माफियाओं और कुछ भ्रष्ट अधिकारियों की मिलीभगत से इनका भी निजी हस्तांतरण कर दिया गया। सरकार ने इसे गंभीर अपराध मानते हुए तत्काल रोक लगाने का निर्णय लिया है। सरकारी जमीन के दुरुपयोग को रोकने के लिए मुख्य सचिव ने पांच अहम निर्देश जारी किए हैं, जिन्हें हर हाल में लागू करने को कहा गया है। निर्देशों के अनुसार अब किसी भी प्रकार की सरकारी भूमि का हस्तांतरण या आवंटन बिना राज्य सरकार की अनुमति के किसी व्यक्ति, संस्था या संगठन को नहीं किया जाएगा। मंत्रिपरिषद की स्वीकृति के बाद ही सरकारी जमीन के हस्तांतरण की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा सकेगी। इसके अलावा राजस्व पदाधिकारियों के स्तर पर जो मामले लंबित या विचाराधीन हैं, उनमें अब एक स्तर ऊपर के अधिकारी की स्वीकृति अनिवार्य होगी। यानी अंचल स्तर पर लंबित मामलों के लिए जिलाधिकारी या प्रमंडलीय आयुक्त की मंजूरी जरूरी होगी। इससे मनमाने फैसलों और भ्रष्टाचार पर रोक लगाने की कोशिश की जाएगी। हालांकि यह भी स्पष्ट किया गया है कि उच्चतम न्यायालय और पटना उच्च न्यायालय द्वारा पूर्व में दिए गए निर्णयों और आदेशों पर यह प्रक्रिया लागू नहीं होगी। राज्य सरकार द्वारा लैंड बैंक सृजन की प्रक्रिया को तेज किया जाएगा। सभी जिलाधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे जिला स्तर पर लैंड बैंक पोर्टल का निर्माण करें, जिससे उद्योगों और विकास परियोजनाओं के लिए भूमि की पारदर्शी और सुलभ उपलब्धता सुनिश्चित की जा सके। मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने अपने पत्र में यह भी साफ किया है कि यदि किसी सरकारी सेवक की संलिप्तता सरकारी भूमि के अवैध हस्तांतरण में पाई जाती है, तो उसके खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी। इसमें विभागीय कार्रवाई, निलंबन और जरूरत पड़ने पर आपराधिक मुकदमा भी शामिल है। सरकार का कहना है कि सिर्फ भू-माफिया ही नहीं, बल्कि उन्हें संरक्षण देने वाले अधिकारियों को भी बख्शा नहीं जाएगा। सरकार ने आम लोगों से कहा है कि कोई भी व्यक्ति सरकारी जमीन की खरीद-बिक्री से पहले संबंधित अभिलेखों की अच्छी तरह जांच कर ले और संदेह की स्थिति में प्रशासन को सूचना दे। सरकार का उद्देश्य है कि सरकारी भूमि की रक्षा हो और उसका उपयोग सही उद्देश्य के लिए किया जाए। नीतीश सरकार का यह फैसला भू-माफियाओं पर नकेल कसने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।



