*स्वामी विवेकानंद कल्चरल सेंटर में ‘दो संस्कृतियों का मेल’ प्रदर्शनी का उद्घाटन, भारतीय और थाई वस्त्र परंपराओं की समृद्ध विरासत हुई प्रदर्शित**
**जिम्मी मिश्रा | बैंकॉक**
भारत और थाईलैंड के बीच सांस्कृतिक संबंधों को नई ऊंचाई देने के उद्देश्य से स्वामी विवेकानंद कल्चरल सेंटर (SVCC), भारतीय दूतावास, बैंकॉक द्वारा 18 जुलाई 2026 को “दो संस्कृतियों का मेल – भारत और थाईलैंड की टेक्सटाइल विरासत” विषय पर एक विशेष प्रदर्शनी का आयोजन किया गया। इस प्रदर्शनी में दोनों देशों की समृद्ध वस्त्र परंपराओं, हस्तशिल्प और सांस्कृतिक विरासत का आकर्षक प्रदर्शन किया गया।

कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण उबोन रत्चथानी विश्वविद्यालय, थाईलैंड के एप्लाइड आर्ट्स एंड आर्किटेक्चर संकाय के प्रो. डॉ. सिथिचाई समंचत का व्याख्यान रहा। उन्होंने “थाई टेक्सटाइल और भारत के साथ थाईलैंड के सांस्कृतिक संबंध” विषय पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए बताया कि किस प्रकार भारत और थाईलैंड की वस्त्र परंपराएं ऐतिहासिक और सांस्कृतिक रूप से एक-दूसरे से जुड़ी रही हैं। उन्होंने थाईलैंड के विभिन्न क्षेत्रों की पारंपरिक बुनाई, डिजाइनों, प्रतीकों और शिल्पकला को प्रस्तुति और प्रदर्शनी के माध्यम से दर्शकों के सामने रखा।
कार्यक्रम में प्रसिद्ध लेखिका, विरासत शोधकर्ता, कलाकार और सांस्कृतिक शिक्षाविद् सुश्री अनीता बोस ने “इंडिया वोवन: साड़ियों, करघों और जीवंत परंपराओं की कहानियां” विषय पर प्रेरणादायक प्रस्तुति दी। उन्होंने भारत के विभिन्न राज्यों की पारंपरिक हस्तकरघा साड़ियों और वस्त्रों की विशिष्टता, उनकी बुनाई की तकनीक, सांस्कृतिक महत्व और उनसे जुड़े बुनकर समुदायों की समृद्ध विरासत से उपस्थित लोगों को परिचित कराया।
उद्घाटन समारोह में शिक्षाविदों, कलाकारों, वस्त्र विशेषज्ञों, सांस्कृतिक शोधकर्ताओं, भारतीय और थाई समुदाय के प्रतिनिधियों सहित बड़ी संख्या में गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे। प्रदर्शनी और दोनों प्रस्तुतियों को दर्शकों ने अत्यंत सराहा और इसे भारत-थाईलैंड के सांस्कृतिक संबंधों को और अधिक मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताया।
प्रदर्शनी में पारंपरिक भारतीय और थाई वस्त्रों का दुर्लभ एवं आकर्षक संग्रह प्रदर्शित किया गया, जिसने दोनों देशों की कलात्मक उत्कृष्टता, सांस्कृतिक पहचान और सदियों पुरानी विरासत को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया। यह आयोजन भारत और थाईलैंड के बीच सांस्कृतिक आदान-प्रदान तथा लोगों के बीच आपसी जुड़ाव को और सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुआ।
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