ढाका। बांग्लादेश ने भारतीय उद्योग समूह अडानी पावर लिमिटेड के साथ कोयला कीमत और बिजली टैरिफ को लेकर चल रहे विवाद में मध्यस्थता (Arbitration) के लिए एक ब्रिटिश लॉ फर्म की नियुक्ति की है। बांग्लादेश पावर डेवलपमेंट बोर्ड (BPDB) का प्रतिनिधित्व अब लंदन स्थित 3VP लॉ फर्म करेगी।

सरकारी अधिकारियों के अनुसार, यह मामला सिंगापुर इंटरनेशनल आर्बिट्रेशन सेंटर (SIAC) में चल रहा है, जहां अडानी पावर ने बांग्लादेश के खिलाफ पिछले साल मध्यस्थता की प्रक्रिया शुरू की थी।
🔹 क्या है पूरा विवाद?
बांग्लादेश का आरोप है कि अडानी पावर द्वारा कोयले की कीमतें जरूरत से ज्यादा रखी गईं, जिससे बिजली उत्पादन लागत अत्यधिक बढ़ गई। वहीं, अडानी पावर का दावा है कि बांग्लादेश पर करीब 485 मिलियन अमेरिकी डॉलर का बकाया है, जो कोयला टैरिफ से जुड़ा हुआ है।
समझौते के तहत मध्यस्थता एक अनिवार्य लेकिन गैर-बाध्यकारी (non-binding) प्रक्रिया है, जिसके बाद पूर्ण अंतरराष्ट्रीय पंचाट (Arbitration) की कार्रवाई हो सकती है।
🔹 राष्ट्रीय समीक्षा समिति की रिपोर्ट
बांग्लादेश की एक राष्ट्रीय समीक्षा समिति ने अडानी पावर से जुड़े बिजली समझौते की जांच के बाद दावा किया है कि उसके पास संभावित भ्रष्टाचार से जुड़े ठोस सबूत मौजूद हैं।
समिति के अनुसार, अडानी अधिकारियों और कुछ बांग्लादेशी अधिकारियों के बीच धन लेन-देन के प्रमाण मिले हैं।
ऊर्जा सलाहकार फौजुल कबीर खान ने कहा कि ये सबूत भ्रष्टाचार निरोधक आयोग (ACC) को सौंप दिए गए हैं और जरूरत पड़ने पर अंतरराष्ट्रीय अदालतों में भी कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
🔹 सरकार बदलने के बाद तेज हुई जांच
5 अगस्त 2024 को तत्कालीन प्रधानमंत्री शेख हसीना की सरकार के पतन के बाद, अंतरिम सरकार ने अडानी के साथ हुए बिजली समझौतों की गहन समीक्षा शुरू की।
यदि यह साबित होता है कि यह सौदा भ्रष्ट तरीकों से किया गया था, तो बांग्लादेश सरकार इसे रद्द भी कर सकती है।
हालांकि, वरिष्ठ विधिवेत्ता शाहदीन मलिक ने सरकार को चेताया है कि अंतरराष्ट्रीय अनुबंध रद्द करने से बांग्लादेश पर 5 अरब डॉलर तक के दावे का जोखिम भी हो सकता है।
🔹 बिजली आपूर्ति और भुगतान की स्थिति
अडानी पावर भारत के झारखंड स्थित गोड्डा पावर प्लांट से बांग्लादेश को 1,600 मेगावाट बिजली की आपूर्ति करता है।
बकाया भुगतान को लेकर पहले विवाद के कारण बिजली आपूर्ति घटाई गई थी, लेकिन जून 2025 में बांग्लादेश द्वारा 437 मिलियन डॉलर का एकमुश्त भुगतान किए जाने के बाद आपूर्ति फिर से बहाल कर दी गई।
📌 निष्कर्ष
अडानी पावर और बांग्लादेश के बीच यह विवाद अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कानूनी मोड़ ले चुका है। आने वाले समय में यह मामला न केवल ऊर्जा क्षेत्र बल्कि भारत–बांग्लादेश आर्थिक संबंधों पर भी असर डाल सकता है।



