समाज जागरण/ अनिल कुमार अग्रहरी
ओबरा/ सोनभद्र। ओबरा तहसील के बिल्ली मारकुंडी खनन क्षेत्र में अवैध खनन का मामला सामने आया है। बी.सी.एस. इंटरप्राइजेज पर खनन निदेशालय और डीजीएमएस के नियमों का उल्लंघन कर प्रतिबंधित नावों का उपयोग करने का आरोप है। कंपनी पर खदान में भरे प्रदूषित पानी को गांव के खेतों में छोड़ने का भी आरोप है, जिससे फसलें बर्बाद हो रही हैं। खनन नियमों के अनुसार, खनन क्षेत्र में अधिक गहराई तक खुदाई नहीं की जा सकती और प्रतिबंधित नावों तथा पंपों का उपयोग वर्जित है। हालांकि, आरोप है कि बी.सी.एस. इंटरप्राइजेज इन नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ा रहा है। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि खनन व्यवसायी पैसों के बल पर नियमों को ताक पर रखकर भारी संपत्ति अर्जित कर रहे हैं। इसी प्रभाव के कारण शिकायत के बावजूद उन पर कोई कार्रवाई नहीं हो रही है। यह स्थिति मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति पर सवाल उठाती है, जो अवैध गतिविधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की बात करती है। खनन विभाग और डीजीएमएस द्वारा नियमों के विरुद्ध चल रहे खनन पट्टेधारक पर कार्रवाई न करना एक बड़ा प्रश्नचिह्न खड़ा करता है। चर्चा है कि अधिकारियों को हर महीने ‘नज़राना’ मिलता है, जिसके कारण कार्रवाई नहीं होती। यदि खनन पट्टे धारकों और संबंधित अधिकारियों की कायदे से जांच की जाए, तो बड़े पैमाने पर राजस्व चोरी का खुलासा हो सकता है और राज्य सरकार को बड़ी धनराशि प्राप्त हो सकती है।
बिल्ली मारकुंडी के कोठा टोला में अवैध खनन से ग्रामीण परेशान हैं। स्थानीय निवासी वीरेंद्र सिंह ने आरोप लगाया है कि खदान मालिक सफीक और उनके सिंडिकेट द्वारा लगातार खदान का प्रदूषित पानी गांव के खेतों में छोड़ा जा रहा है, जिससे फसलें बर्बाद हो रही हैं। वीरेंदर सिंह ने बताया कि पिछले लगभग पांच सालों से बड़े-बड़े पंप और नावों का उपयोग करके खदान से पानी निकालकर गांव में बहाया जा रहा है। इस प्रदूषित पानी के कारण धान और सब्जियों की खेती करना मुश्किल हो गया है, जिससे किसानों को भारी नुकसान हो रहा है। ग्रामीणों द्वारा बार-बार मना करने पर भी खदान मालिक सफीक ने ध्यान नहीं दिया। वीरेंद्र सिंह के अनुसार, सफीक ने कथित तौर पर कहा कि वे प्रदूषित पानी बहाना जारी रखेंगे और उन्हें किसी का डर नहीं है, क्योंकि प्रशासन उनके साथ है। ग्रामीणों ने इस समस्या को लेकर कई बार अधिकारियों से गुहार लगाई है, लेकिन उनकी शिकायत पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। मीडिया में भी अवैध खनन और प्रदूषित पानी की निकासी की खबरें प्रकाशित होने के बावजूद, प्रशासन ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया है। वीरेंद्र सिंह ने बताया कि उनकी तीन बीघे जमीन पूरी तरह से खराब हो चुकी है, और अन्य ग्रामीणों की भी कई बीघे फसलें प्रदूषित पानी के कारण बर्बाद हो गई हैं। ग्रामीणों ने प्रशासन से नुकसान की भरपाई की मांग की है और चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगें पूरी नहीं हुईं, तो वे एसडीएम और डीएम के कार्यालय का घेराव करेंगे। स्थानीय निवासियों ने बताया कि खनन के दौरान होने वाली ब्लास्टिंग से पत्थर गांव तक आ जाते हैं, जिससे मकान क्षतिग्रस्त हो रहे हैं। खदानों को घेरा नहीं गया है, जिससे दुर्घटना का खतरा बना रहता है। ब्लास्टिंग से पहले ग्रामीणों को कोई सूचना भी नहीं दी जाती। एक ग्रामीण ने बताया कि एक बार ब्लास्टिंग के कारण क्षतिग्रस्त हुई दीवार उनके बच्चे पर गिर गई थी। स्थानीय निवासी सत्येंद्र कुमार ने बताया कि शफीक की खदान से निकलने वाला पानी खेतों में छोड़ा जा रहा है। इससे धान और गेहूं की खेती प्रभावित हो रही है। पहले यहां बड़े पैमाने पर सरसों और चने की खेती होती थी, लेकिन अब पानी भरने से फसलें बर्बाद हो रही हैं। ग्रामीणों का कहना है कि लगातार शिकायतें करने और मीडिया में खबरें प्रकाशित होने के बावजूद खनन व्यवसायियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। अधिकारियों पर खनन माफिया के खिलाफ कार्रवाई करने से पीछे हटने का आरोप है।
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