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​बेलिया बड़ी में भ्रष्टाचार का नंगा नाच: 16 लाख की नाली बनी ग्रामीणों के लिए जी का जंजाल, सत्ता के रसूख के आगे नतमस्तक प्रशासन

​अनूपपुर/कोतमा। अनूपपुर विकासखंड की ग्राम पंचायत बेलिया बड़ी में विकास के नाम पर सरकारी धन की लूट का एक ऐसा काला अध्याय सामने आया है, जिसने पूरे प्रशासनिक तंत्र और सत्ता के रसूख को कटघरे में खड़ा कर दिया है। यहाँ लगभग 16 लाख रुपये की लागत से बनाई जा रही नाली निर्माण कार्य ने ग्रामीणों के लिए विकास के बजाय मुसीबत का पहाड़ खड़ा कर दिया है। इस पूरे घोटाले के केंद्र में सत्ताधारी दल भाजपा के एक स्थानीय पदाधिकारी का नाम सामने आ रहा है, जिनकी हनक और दबंगई के आगे न तो सरकारी नियम-कायदे टिक पा रहे हैं और न ही जिम्मेदार अधिकारी जुबान खोलने की जहमत उठा पा रहे हैं।


​तकनीकी मापदंडों की धज्जियां, कागजों पर सिमटा विकास
​निर्माण कार्य की हकीकत तकनीकी मानकों से कोसों दूर है। निर्माण में बरती गई भारी अनियमितताएँ अब स्पष्ट दिखाई देने लगी हैं। नियमानुसार नाली की नींव (बेसमेंट) कम से कम 4 इंच की होनी चाहिए थी, जिसे ठेकेदार ने मात्र 3 इंच में ही समेटकर खानापूर्ति कर दी। ढाँचे को मजबूती देने के लिए जो सरिया 6 इंच की दूरी पर लगाया जाना अनिवार्य था, उसे 1-1 फीट की दूरी पर लगाकर निर्माण की गुणवत्ता और आयु के साथ सीधा खिलवाड़ किया गया है। घटिया सामग्री के इस्तेमाल का आलम यह है कि निर्माण कार्य अभी अपने अंतिम चरण में भी नहीं पहुँचा है कि नाली अभी से दरकने और जाम होने लगी है। ग्रामीणों का मानना है कि पहली ही बरसात में यह नाली मलबे के ढेर में तब्दील हो जाएगी, जिससे जनता की गाढ़ी कमाई का बड़ा हिस्सा पानी में बह जाएगा।


​इंजीनियरों की संदिग्ध चुप्पी और सत्ता का संरक्षण
​इस पूरे भ्रष्टाचार के खेल में संबंधित विभाग के इंजीनियरों की भूमिका बेहद संदिग्ध बनी हुई है। ग्रामीणों और मीडिया प्रतिनिधियों द्वारा बार-बार संपर्क करने और मौके पर आकर निरीक्षण की गुहार लगाने के बावजूद, जिम्मेदार अधिकारी न तो मौके पर पहुँचने की हिम्मत जुटा पा रहे हैं और न ही फोन उठाना मुनासिब समझ रहे हैं। ऐसा प्रतीत होता है कि मानो इंजीनियरों ने अपनी कार्यकुशलता और कर्तव्यनिष्ठा को ‘नेताजी’ की हनक के आगे गिरवी रख दिया है। अधिकारियों की यह चुप्पी सीधे तौर पर भ्रष्टाचार को संरक्षण देने और मिलीभगत की ओर इशारा करती है।


​तानाशाही से ग्रामीणों का जीना मुहाल
​ठेकेदार की मनमानी और तानाशाही ने गांव का जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है। निर्माण कार्य के दौरान खुदाई से निकली मिट्टी को रास्तों पर ही पटक दिया गया है, जिससे आवागमन पूरी तरह अवरुद्ध हो गया है। बारिश के मौसम में यह मिट्टी अब जानलेवा कीचड़ में तब्दील हो चुकी है, जिससे आए दिन दुर्घटनाओं का खतरा बना हुआ है। जब ग्रामीण इस अव्यवस्था और घटिया निर्माण का विरोध करते हैं, तो उन्हें ‘भाजपा मंडल महामंत्री’ के रसूख का रौब दिखाया जाता है। राजनीतिक दबदबे के दम पर आम जनता की आवाज को दबाने के इस प्रयास से पंचायत क्षेत्र में भारी आक्रोश व्याप्त है।


​प्रशासन की मौन स्वीकृति, ग्रामीणों में उग्र आंदोलन की चेतावनी
​बेलिया बड़ी के ग्रामीण अब आर-पार की लड़ाई के मूड में हैं। सवाल यह उठ रहा है कि क्या सत्ताधारी दल का पदाधिकारी होना सरकारी खजाने को लूटने का लाइसेंस है? और क्या जिला प्रशासन केवल मूकदर्शक बनकर जनता के पैसों की हो रही बर्बादी को देखता रहेगा? ग्रामीणों ने प्रशासन को स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि अविलंब निर्माण कार्य की उच्च स्तरीय जांच नहीं कराई गई और घटिया सामग्री को दुरुस्त नहीं किया गया, तो वे सड़क पर उतरकर उग्र आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे।
​फिलहाल, बेलिया बड़ी की यह नाली केवल विकास का ढांचा नहीं, बल्कि उस भ्रष्टाचार का जीवंत प्रमाण बन चुकी है, जो सत्ता के संरक्षण में फली-फूल रही है। अब सबकी निगाहें जिला प्रशासन पर टिकी हैं कि क्या जिम्मेदार अधिकारी इस ‘भाजपाई ठेकेदार’ पर कार्रवाई की हिम्मत जुटा पाते हैं, या फिर यह भ्रष्टाचार इसी तरह बेलिया बड़ी की सूरत बिगाड़ता रहेगा।


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