पप्पू यादव का आह्वान – “यह संघर्ष राजनीति से ऊपर है, यह हमारे बच्चों के भविष्य की लड़ाई है”
पटना।
बिहार में 12 जनवरी 2025 को होने वाला बिहार बंद अब एक बड़े जन आंदोलन का रूप लेता जा रहा है। प्रतियोगिता परीक्षाओं में पेपर लीक और अन्य अनियमितताओं के खिलाफ यह बंद छात्र-युवाओं की आवाज बन गया है। बिहार में लाखों छात्र-युवा अब इस बंद के माध्यम से एकजुट हो रहे हैं ताकि राज्य सरकार पर दबाव डाला जा सके और प्रतियोगिता परीक्षाओं को निष्पक्ष, पारदर्शी और सही तरीके से आयोजित किया जा सके।
बिहार बंद के आयोजक “छात्र-युवाशक्ति बिहार” के सदस्य और पूर्व सांसद पप्पू यादव ने स्पष्ट किया कि यह आंदोलन किसी भी राजनीतिक एजेंडे से परे है। उन्होंने कहा, “यह कोई राजनीतिक आंदोलन नहीं है। यह आपके और आपके बच्चों के भविष्य का सवाल है। लाखों परिवार अपनी मेहनत की कमाई, अपनी ज़मीन और गहनों को बेचकर अपने बच्चों को पढ़ाते हैं ताकि वे एक सम्मानजनक नौकरी पा सकें, लेकिन सत्ता में बैठे लोग उनकी मेहनत का मोल नहीं समझते। वे खुद नौकरियों को बेचने में कोई संकोच नहीं करते। इसीलिए बिहार को बचाने के लिए यह बंद जरूरी है।”
पप्पू यादव ने जनता से अपील करते हुए कहा, “हम सभी को मिलकर यह सुनिश्चित करना होगा कि राज्य की परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता हो और किसी भी प्रकार की धोखाधड़ी या अनियमितता का शिकार हमारे बच्चे न हों।” उन्होंने यह भी जोड़ा, “12 जनवरी को हम सभी एकजुट होकर सरकार से यह सवाल करेंगे कि क्या उनका कर्तव्य नहीं है कि वे बिहार के युवाओं का भविष्य सुरक्षित रखें?”
इस बंद का उद्देश्य 70वीं बीपीएससी पुनर्परीक्षा, बहाली और अन्य प्रतियोगिता परीक्षाओं में पेपर लीक की उच्चस्तरीय जांच की मांग करना है। आयोजकों का कहना है कि जब तक परीक्षा प्रणाली में सुधार नहीं होगा, तब तक बिहार का युवा वर्ग अपनी मेहनत के साथ विश्वासघात महसूस करता रहेगा।
छात्र-युवाशक्ति बिहार ने इस बंद को लेकर राज्यभर में जागरूकता अभियान भी चलाया है। बिहार के विभिन्न हिस्सों में छात्र संगठनों ने 12 जनवरी को बंद में अधिक से अधिक लोगों को शामिल होने के लिए तैयारियां शुरू कर दी हैं। उनका कहना है कि यह आंदोलन केवल परीक्षा व्यवस्था के खिलाफ नहीं है, बल्कि यह बिहार के युवाओं के अधिकारों की रक्षा के लिए है।
बिहार बंद के समर्थन में कांग्रेस नेता, छात्र संगठन और विभिन्न समाजिक कार्यकर्ता भी खुलकर सामने आए हैं, और यह आंदोलन अब राज्य में एक व्यापक जनांदोलन का रूप ले चुका है। यह देखना अब बाकी है कि बिहार सरकार इस मुद्दे पर किस तरह की कार्रवाई करती है, और क्या 12 जनवरी को आयोजित होने वाला यह बंद राज्य सरकार के लिए कोई ठोस संदेश भेजेगा।
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