मथुरा के गोविन्द नगर में चल रहे सत्संग में पंडित राजेश अग्निहोत्री भागवताचार्य ने कहा कि आजकल की ब्वायफ़्रेंड और गर्ल फ्रेंड की चल रही परम्परा सर्वथा अनुचित है। शेक्सपियर ने कहा था, ”एक लड़का कभी किसी लड़की का दोस्त नहीं हो सकता, क्योंकि उसमें जुनून है, शारीरिक इच्छा है।” आयरिश कवि ऑस्कर वाइल्ड ने भी यही बात कही थी। “एक महिला और एक पुरुष के बीच केवल दोस्ती होना असंभव है। जो मौजूद हो सकता है वह लालसा, कमजोरी, नफरत या प्यार है।”
—राजेश्वरानन्द जी ने कहा, “एक लड़का और एक लड़की दोस्त हो सकते हैं लेकिन वे निश्चित रूप से प्यार में पड़ जाएंगे। शायद बहुत कम समय के लिए या गलत समय पर। या बहुत देर से, और हमेशा के लिए नहीं। लेकिन वे प्यार में पड़ जाएंगे।”
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सच कहें तो लड़के-लड़कियों के बीच दोस्ती ही असंभव और प्रकृति के विरुद्ध है। क्योंकि अगर दोस्ती ही रहेगी तो प्रकृति अपना अस्तित्व खो देगी। चुम्बक और लोहा कभी एक साथ नहीं रह सकते। आकर्षित करेगा यदि कोई इससे बचता है, तो वह पाखंडी या धोखेबाज है।
मोम आग के पास पिघलता है। आग और घी एक साथ कभी नहीं रह सकते हैं यदि आग के पास घी रहता है तो घी का पिघलना निश्चित है और घी यदि पिघल कर आग के पास चला गया तो निश्चित ही आग विकराल रूप ले लेगी।एक लड़का और लड़की दोस्त हो सकते हैं, लेकिन अंततः यह प्यार या अवैध रिश्ते में बदल जाता है। और यह सामान्य है.
सर्वशक्तिमान ईश्वर ने पुरुषों और महिलाओं को विपरीत आकर्षण के साथ भेजा है।

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