google-site-verification: google2b21991adbe5cec3.html

बैंक अधिकारियों की मनमानी एवं षड्यंत्र से परेशान कारोबारी

लोन के बाद षड्यंत्र के तहत कारोबार को ठप करने का लगाया आरोप

नोएडा। जहाँ एक तरफ भारत सरकार अपने ड्रीम प्रोजेक्ट आत्मनिर्भर भारत” और “मेक इन इंडिया” के जरिये लघु उद्योग को बढ़ावा दे रही है वहीँ एक बैंक के कर्मचारियों की वजह से वजह से लघु उद्योग कारोबारी इस कदर परेशान हो गया की उसका पूरा कारोबार ही ठप हो गया है , विभिन्न प्रकार के रिमोट बनाने की कंपनी चलाने वाले दीप नारायण गोयल का आरोप है की इंडियन बैंक के अधिकारीयों की मनमानी के चलते उनका कारोबार चौपट हो गया है और अब उनकी कहीं भी सुनवाई नहीं हो रही है, शनिवार को नोएडा मीडिया क्लब में प्रेसवार्ता कर अपने साथ हुई ज्यादती को दीप नारायण गोयल ने अपना दर्द बयाँ किया उन्होंने बताया की भारतीय सरकार एमएसएमई को “आत्मनिर्भर भारत” और “मेक इन इंडिया” के तहत पूर्ण समर्थन प्रदान कर रही है ताकि देश में उत्पादित वस्तुएँ बढ़ें और आर्थिक विकास को प्रोत्साहन मिले। इसके बावजूद इंडियन बैंक के अधिकारियों ने अपने बैंकिंग अनुभव और ज्ञान का दुरुपयोग करते हुए, 14 वर्षों से निरंतर प्रगति कर रही एवं अच्छे क्रेडिट इतिहास वाले लघु उद्योग को जानबूझकर बर्बाद कर दिया। अधिवक्ताओं, मूल्यांकनकर्ताओं एवं अन्य अधिकारियों की मिलीभगत से एक गिरोह बनाकर माननीय डीआरटी न्यायालय में झूठे एवं मनगढ़ंत दस्तावेज प्रस्तुत किए गए। बैंक बदलने हेतु प्रलोभन तथा 10 करोड़ की सुविधा का झूठा आश्वासन दिया गया, स्वीकृत निधि को जानबूझकर देर से जारी किया गया अथवा रोका गया, जिससे दोहरी ईएमआई का बोझ एवं नकदी संकट उत्पन्न हुआ । निरीक्षण रिपोर्टों में फर्जीवाड़ा, 6.27 करोड़ के वास्तविक लेन-देन को दबाया गया तथा स्टॉक और मशीनरी की अनुपस्थिति का झूठा दावा किया गया। संपत्तियों (बरही, काला अंब एवं आवासीय मकान) की औपचारिक नीलामी औने-पौने दामों पर की गई, व्यक्तिगत दस्तावेज़ों व सामान का ग़लत उपयोग किया गया, दंडात्मक ब्याज दर 29.25% तक थोपकर बकाया राशि को अनुचित रूप से बढ़ाया गया और 16.03 करोड़ के मूलधन के विरुद्ध 18.54 करोड़ की रिकवरी केवल 5–10 महीनों में करने के बावजूद भी लगभग 14.39 करोड़ मूल्य की चल संपत्तियों (स्टॉक एवं मशीनरी) को जबरन रोककर उन्हें कबाड़ घोषित करने का प्रयास किया जा रहा है । इन समस्त कार्रवाइयों के परिणामस्वरूप अधिकारियों द्वारा डराना-धमकाना एवं आपराधिक कदाचार किया गया जिससे शिकायतकर्ता को 38–50 करोड़ से अधिक की अपूरणीय वित्तीय, प्रतिष्ठात्मक एवं संचालनात्मक क्षति हुई है,अपने साथ हुई ज्यादती को लेकर बैंक के खिलाफ दीप नारायण गोयल ने विभिन्न सरकारी एजेंसियों को भी बैंक के खिलाफ शिकायत दी है ताकि उन्हें न्याय मिल सके और उनका कारोबार फिर से शुरू हो सके।


Discover more from समाज जागरण

Subscribe to get the latest posts sent to your email.

🛍️ Today’s Best Deals

(Advertisement)