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कैंसर- घातक बीमारी, लेकिन शुरुआती पहचान ही सबसे बड़ा हथियार

वीरेंद्र चौहान, समाज जागरण ब्यूरो किशनगंज।
18 फरवरी।
कैंसर आज के समय की सबसे गंभीर और चुनौतीपूर्ण बीमारियों में से एक है। इसकी सबसे बड़ी समस्या यह है कि अधिकतर मामलों में मरीज तब सामने आते हैं, जब बीमारी अंतिम अवस्था में पहुंच चुकी होती है। लेकिन यदि कैंसर की पहचान शुरुआती चरण में हो जाए, तो इसका उपचार संभव है और मरीज सामान्य, स्वस्थ जीवन जी सकता है। इसी उद्देश्य से स्वास्थ्य विभाग द्वारा ग्रामीण स्तर पर कैंसर स्क्रीनिंग और जागरूकता कार्यक्रमों का विस्तार किया जा रहा है।


इसी क्रम में पोठिया प्रखंड के हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर, बलदियाहाट में कैंसर स्क्रीनिंग एवं जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। शिविर में कुल 48 लोगों की कैंसर जांच की गई, जिनमें 17 महिलाएं एवं 31 पुरुष शामिल रहे। जांच के दौरान 9 संदिग्ध मामले सामने आए, जिनमें 2 महिलाएं और 7 पुरुष शामिल हैं। सभी संदिग्ध मरीजों को आगे की विशेष जांच एवं उपचार के लिए उच्च स्वास्थ्य संस्थान में रेफर कर दिया गया है।


शुरुआती पहचान से संभव है कैंसर पर नियंत्रण
सिविल सर्जन किशनगंज डॉ. राज कुमार चौधरी ने कहा कि कैंसर लाइलाज बीमारी नहीं है, बशर्ते इसकी पहचान समय रहते हो जाए। उन्होंने बताया कि ओरल, ब्रेस्ट और सर्वाइकल कैंसर की शुरुआती जांच अपेक्षाकृत सरल है और नियमित स्क्रीनिंग से गंभीर स्थिति से बचा जा सकता है। उन्होंने आमजन से अपील की कि शरीर में किसी भी असामान्य बदलाव, गांठ, लंबे समय तक न भरने वाले घाव या असामान्य दर्द को नजरअंदाज न करें और तुरंत चिकित्सकीय सलाह लें।


जीवनशैली में सुधार से होगा बचाव
गैर संचारी रोग पदाधिकारी डॉ. उर्मिला कुमारी ने कहा कि तंबाकू और शराब का सेवन, असंतुलित खानपान, शारीरिक निष्क्रियता और प्रदूषण कैंसर के जोखिम को बढ़ाते हैं। यदि लोग नशे से दूरी बनाएं, संतुलित आहार लें और नियमित स्वास्थ्य जांच को अपनाएं, तो कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से काफी हद तक बचाव संभव है।


नियमित जांच को दिनचर्या का हिस्सा बनाएं
जिला पदाधिकारी विशाल राज ने आमजन से अपील करते हुए कहा कि कैंसर से लड़ने का सबसे प्रभावी उपाय जागरूकता और नियमित जांच है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा गांव-गांव में कैंसर स्क्रीनिंग कैंप लगाए जा रहे हैं। इन कार्यक्रमों का वास्तविक लाभ तभी मिलेगा, जब लोग स्वयं आगे आकर जांच कराएंगे और स्वास्थ्य के प्रति जिम्मेदार बनेंगे। नियमित जांच को अपनी दिनचर्या में शामिल करना आज की सबसे बड़ी आवश्यकता है।


कैंप के दौरान स्वास्थ्यकर्मियों को कैंसर स्क्रीनिंग की तकनीकों की जानकारी दी गई। विशेष रूप से महिलाओं को ब्रेस्ट कैंसर की स्वयं जांच की विधि समझाई गई, ताकि वे स्वयं जागरूक रहें और समुदाय की अन्य महिलाओं तक भी यह संदेश पहुंचा सकें।
स्वास्थ्य विभाग का यह प्रयास ग्रामीण क्षेत्रों में कैंसर की समय पर पहचान और उपचार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। जागरूकता, नियमित स्क्रीनिंग और स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर ही कैंसर जैसी गंभीर बीमारी पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा सकता है।


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