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गौरेला साप्ताहिक बाजार में अव्यवस्था का विस्फोट – जाम से जकड़ा शहर, प्रशासनिक तंत्र पर गंभीर सवाल

गौरेला। जिला मुख्यालय के अंतर्गत आने वाला साप्ताहिक बाजार एक बार फिर अव्यवस्था और प्रशासनिक उदासीनता का जीता-जागता उदाहरण बनकर सामने आया है। बाजार के दिन पूरे नगर की यातायात व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई, जिससे आमजन को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा। स्थिति इतनी भयावह हो गई कि सड़कों पर वाहन रेंगते नजर आए और पैदल चलना तक दूभर हो गया।


मुख्य बाजार मार्गों पर अनियंत्रित भीड़, बेतरतीब खड़े वाहन, और सड़कों तक फैले अतिक्रमण ने हालात को विस्फोटक बना दिया।
दुकानदारों द्वारा सड़क किनारे ही नहीं बल्कि सड़क के बीच तक अतिक्रमण कर लिया गया, जिससे मार्ग अत्यंत संकरा हो गया। ऐसे में दोपहिया, चारपहिया और पैदल राहगीरों का एक साथ गुजरना लगभग असंभव हो गया। परिणामस्वरूप, कई किलोमीटर लंबा जाम लग गया, जिसमें स्कूली बच्चे, बुजुर्ग, महिलाएं और मरीज तक फंसे रहे।


सबसे गंभीर पहलू यह रहा कि इस पूरी अव्यवस्था के दौरान जिला प्रशासन, नगर पालिका परिषद और थाना यातायात की भूमिका नगण्य दिखाई दी। मौके पर ना तो पर्याप्त ट्रैफिक पुलिस की तैनाती थी और ना ही किसी प्रकार का नियंत्रण या दिशा-निर्देशन देखने को मिला। यह स्थिति सीधे तौर पर प्रशासनिक विफलता और लापरवाही को उजागर करती है।


स्थानीय नागरिकों का कहना है कि साप्ताहिक बाजार के दिन यह समस्या हर बार उत्पन्न होती है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी केवल औपचारिकता निभाते नजर आते हैं। ना तो अतिक्रमण हटाने के लिए कोई ठोस कार्रवाई की जाती है और ना ही ट्रैफिक प्रबंधन के लिए कोई दीर्घकालिक योजना बनाई गई है।


यह भी चिंता का विषय है कि यदि इस तरह की स्थिति में कोई आपातकालीन सेवा – जैसे एंबुलेंस या फायर ब्रिगेड – को गुजरना पड़े, तो उनके लिए रास्ता मिलना लगभग असंभव हो जाएगा। यह सीधे तौर पर जन-जीवन की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ है।
जनता के सब्र का बांध अब टूटने की कगार पर है। लोगों में प्रशासन के प्रति आक्रोश बढ़ता जा रहा है। यदि समय रहते इस समस्या का स्थायी समाधान नहीं किया गया, तो आने वाले समय में जनआंदोलन की स्थिति भी बन सकती है।

प्रशासन के लिए कड़े सवाल:

  • आखिर हर सप्ताह होने वाली इस समस्या का स्थायी समाधान क्यों नहीं निकाला जा रहा?

-> अतिक्रमण हटाने के नाम पर कार्रवाई केवल कागजों तक ही सीमित क्यों है?

-> ट्रैफिक व्यवस्था को संभालने के लिए जिम्मेदार विभाग आखिर कब जागेंगे?

जनता की प्रमुख मांगें:

बाजार क्षेत्र से तत्काल अतिक्रमण हटाया जाए

साप्ताहिक बाजार के दिन विशेष ट्रैफिक प्लान लागू किया जाए

पुलिस और ट्रैफिक कर्मियों की पर्याप्त तैनाती हो

वैकल्पिक मार्गों को चिन्हित कर सख्ती से लागू किया जाए

जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय कर कार्रवाई की जाए

निष्कर्ष

गौरेला साप्ताहिक बाजार की यह अव्यवस्था अब केवल एक सामान्य समस्या नहीं रह गई है, बल्कि यह प्रशासनिक लापरवाही का गंभीर प्रतीक बन चुकी है। यदि जिला प्रशासन ने शीघ्र और सख्त कदम नहीं उठाए, तो यह समस्या किसी बड़े हादसे का कारण बन सकती है। अब समय आ गया है कि जिम्मेदार विभाग केवल आश्वासन नहीं, बल्कि जमीन पर ठोस कार्रवाई करके जनता को राहत


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