अनूपपुर,
मध्य प्रदेश के अनूपपुर जिले के अंतर्गत आने वाले ग्राम केल्हौरी, जिसे अपनी उन्नत खेती के कारण “मिनी पंजाब” के रूप में जाना जाता है, वहां के किसान वर्तमान में भारी-भरकम बिजली बिलों और विभाग की नई नीतियों के कारण गहरे संकट में हैं। क्षेत्र के किसान नेता जितेन्द्र सिंह ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और अन्य वरिष्ठ मंत्रियों को पत्र लिखकर बिजली विभाग की कथित “किसान विरोधी” नीतियों के खिलाफ तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।
विवाद का मुख्य कारण: कृषि कनेक्शन बना ‘कॉमर्शियल’
किसानों की मुख्य शिकायत यह है कि म.प्र. पूर्वी क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड, चचाई (अनूपपुर) के अधिकारियों ने विगत 30 वर्षों से कृषि कार्य हेतु उपयोग किए जा रहे 20 हॉर्स पॉवर के पंप कनेक्शनों को अचानक कॉमर्शियल (व्यावसायिक) श्रेणी में परिवर्तित कर दिया है। इसके साथ ही, खेतों में स्मार्ट मीटर लगा दिए गए हैं, जिसके कारण बिजली बिलों में अप्रत्याशित वृद्धि हुई है।
बिलों में भारी उछाल: 5 हजार से सीधे 30 हजार रुपये
किसानों द्वारा प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार,पहले किसानों को लगभग 5,000 रुपये प्रति माह या छह माह में एक बार 30,000 रुपये का बिल आता था, जिसे किसान सुगमता से जमा कर देते थे।वही वर्तमान स्थिति में स्मार्ट मीटर और कॉमर्शियल श्रेणी लागू होने के बाद अब किसानों को 30,000 रुपये प्रति महीने का बिल थमाया जा रहा है।
सरकार की मंशा पर सवाल
शिकायत पत्र में सीधे तौर पर विद्युत वितरण केंद्र, अनूपपुर के अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिह्न लगाए गए हैं। किसानों का कहना है कि एक ओर मुख्यमंत्री और ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर किसानों को विशेष अनुदान और छूट देने की बात करते हैं, वहीं दूसरी ओर स्थानीय अधिकारी सरकार की छवि को धूमिल कर रहे हैं। किसानों ने पूछा है कि क्या यह सरकार का अप्रत्यक्ष निर्देश है या अधिकारी स्वेच्छाचारी होकर किसानों से “मोटी रकम” वसूल रहे हैं।
किसानों की प्रमुख मांगें
जितेन्द्र सिंह और केल्हौरी के कृषक समूह ने सरकार से मांगे की हैं कि कृषि पंपों पर लगाए गए स्मार्ट मीटरों को तत्काल हटाया जाए।
कनेक्शनों को पुनः कृषि श्रेणी में बहाल किया जाए और कॉमर्शियल देयकों को वापस लिया जाए। विधानसभा चुनाव घोषणा पत्र के अनुरूप किसानों को बिजली बिलों में विशेष छूट प्रदान की जाए।
भारत का अन्नदाता जब दुखी होगा, तो सरकार की कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिह्न लगना स्वाभाविक है। मुख्यमंत्री की स्वयं इस विषय पर संज्ञान लेकर किसानों के संरक्षक के रूप में हस्तक्षेप करें



